दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली कांग्रेस की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली को लेकर पार्टी ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी सिलसिले में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने 23 अक्टूबर को दिल्ली में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में रैली की तैयारियों, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और अधिक से अधिक लोगों को दिल्ली लाने की रणनीति पर चर्चा हुई। कांग्रेस ने हरियाणा इकाई को रैली में एक लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य दिया है।
कांग्रेस इस रैली के जरिए कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रही है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रही है।
बैठक में हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी संजय दत्त, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, रणदीप सिंह सुरजेवाला और सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाने और रैली में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई। हरियाणा कांग्रेस ने एक लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है और इससे अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास करने की बात कही है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ भी रैली की तैयारियों को लेकर चर्चा हुई। पार्टी राज्य के विभिन्न जिलों से कार्यकर्ताओं को दिल्ली लाने की योजना बना रही है। उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संगठन के अलग-अलग स्तरों पर जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं।
राज्य में रैली के लिए दो लाख कार्यकर्ताओं को जुटाने का लक्ष्य भी सामने आया है।कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, 1 नवंबर को होने वाली महारैली ‘दिल्ली चलो मार्च’ का समापन भी होगी। पार्टी ने इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई है। कांग्रेस का कहना है कि रैली के जरिए लोकतंत्र की रक्षा, मतदाताओं के अधिकार और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
कांग्रेस इस रैली को अपनी राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक ताकत दिखाने के अवसर के रूप में देख रही है। पार्टी की कोशिश है कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता दिल्ली पहुंचें। अब सबकी नजर 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली पर है, जहां कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर अपना पक्ष रखेगी।





