उत्तर प्रदेश में करीब 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं से अतिरिक्त सिक्योरिटी राशि की वसूली का मामला अब विद्युत नियामक आयोग तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस व्यवस्था के खिलाफ आयोग में याचिका दाखिल कर नियमों में बदलाव की मांग की है। परिषद का कहना है कि बिजली कनेक्शन का लोड बढ़ने पर उपभोक्ताओं से केवल बढ़े हुए लोड के आधार पर अतिरिक्त सिक्योरिटी ली जानी चाहिए।
मामला बिजली उपभोक्ताओं के स्वीकृत विद्युत भार में बदलाव से जुड़ा है। आरोप है कि लोड बढ़ने पर कुछ मामलों में बिजली कंपनियां सिर्फ अतिरिक्त लोड की सिक्योरिटी लेने के बजाय पुराने पूरे लोड पर भी मौजूदा दर लागू कर रही हैं। इससे पहले जमा की गई सिक्योरिटी राशि का पूरा समायोजन नहीं हो पा रहा है और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के मुताबिक, उत्तर प्रदेश विद्युत आपूर्ति संहिता, 2005 में लोड बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त सिक्योरिटी लेने का प्रावधान है। ऐसे में अगर किसी उपभोक्ता का लोड 1 किलोवाट या 1 केवीए बढ़ता है, तो अतिरिक्त सिक्योरिटी भी उसी बढ़े हुए भार के आधार पर तय होनी चाहिए। पुराने पूरे लोड पर नई दर लागू करना उचित नहीं है।
परिषद ने एक औद्योगिक कनेक्शन का उदाहरण देते हुए बताया कि 300 केवीए के पुराने कनेक्शन में मामूली लोड बढ़ाने पर करीब 4 लाख रुपये अतिरिक्त सिक्योरिटी की मांग की गई। परिषद का कहना है कि अगर यह रकम पुराने लोड को मौजूदा दर से दोबारा आंकने के कारण बनी है तो इसकी समीक्षा जरूरी है।
याचिका में आयोग से बिजली कंपनियों से ऐसे सभी मामलों का पूरा रिकॉर्ड मंगाने की मांग की गई है। इसमें पुराने लोड, नए लोड, पहले से जमा सिक्योरिटी और अतिरिक्त मांगी गई राशि का अलग-अलग ब्योरा शामिल करने की मांग है। परिषद ने कहा है कि यदि जांच में किसी उपभोक्ता से निर्धारित राशि से अधिक वसूली पाई जाती है तो उसका समायोजन या रिफंड कराया जाना चाहिए।
अब इस मामले में विद्युत नियामक आयोग के फैसले पर नजर है। आयोग के निर्देश से यह स्पष्ट हो सकता है कि भविष्य में लोड बढ़ाने वाले उपभोक्ताओं से अतिरिक्त सिक्योरिटी किस तरीके से ली जाएगी और पहले से जमा राशि का किस तरह समायोजन किया जाएगा।





