उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे पर चर्चा तेज होने की खबरें हैं। कांग्रेस गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी अखिलेश यादव के सामने करीब 125 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा पेश कर सकती है। इस बातचीत में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अहम भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, सीटों की संख्या को लेकर दोनों दलों के बीच अभी किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए पिछले चुनावों के नतीजों और संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के प्रदर्शन का आकलन कर रही है। पार्टी का जोर उन सीटों पर है, जहां उसका संगठन मजबूत है और जहां उसे जीत की बेहतर संभावनाएं दिखाई देती हैं। इसी रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठकें कर चुनावी तैयारियों और संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा की जा रही है।
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा था। इस गठबंधन में कांग्रेस ने 17 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और छह सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, समाजवादी पार्टी ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन नतीजों के बाद दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। कांग्रेस अब इसी चुनावी प्रदर्शन को आधार बनाकर विधानसभा चुनाव में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती है।
हालांकि, सीटों के बंटवारे पर दोनों दलों के बीच सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कांग्रेस अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि समाजवादी पार्टी के लिए भी अपने मजबूत क्षेत्रों और उम्मीदवारों को प्राथमिकता देना जरूरी होगा। ऐसे में प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव के बीच बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों दलों को ऐसा रास्ता निकालना होगा, जिससे गठबंधन में तालमेल बना रहे और चुनाव में एक-दूसरे के वोटों का लाभ मिल सके।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले सीटों का बंटवारा विपक्षी गठबंधन की रणनीति का अहम हिस्सा होगा। कांग्रेस की संभावित 125 सीटों की मांग पर समाजवादी पार्टी का रुख क्या रहता है और दोनों दल किस समझौते पर पहुंचते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, दोनों पार्टियों की चुनावी तैयारियों और गठबंधन की रणनीति पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।





