मुझे सॉफ्ट टारगेट बनाया गया’: यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे JNU के बर्खास्त प्रोफेसर ने आरोपों को नकारा

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़े यौन उत्पीड़न विवाद में कांग्रेस सांसद और जेएनयू के प्रोफेसर रहे बिमोल अकोइजाम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उन्हें मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर अपनी मुखर राजनीतिक भूमिका के कारण निशाना बनाया जा रहा है।

12 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, अकोइजाम ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनके खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चला रहा है। उन्होंने कहा कि वह मणिपुर में जातीय हिंसा और उससे निपटने के तरीके पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

यह विवाद जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत और विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की जांच से जुड़ा है। मामला कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम से संबंधित कानून के तहत आगे बढ़ाया गया। विश्वविद्यालय की ओर से की गई कार्रवाई के बीच अकोइजाम ने आरोपों को निराधार बताया है।अकोइजाम का कहना है कि उन्होंने जांच प्रक्रिया में सहयोग किया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 31 मई को अपना लिखित जवाब जमा किया था और 16 जुलाई को आंतरिक शिकायत समिति के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा था। उनके अनुसार, बचाव पक्ष के गवाहों ने भी 14 अगस्त को अपने बयान दर्ज कराए थे।

उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया कि उन्होंने जांच से जुड़े ईमेल का जवाब नहीं दिया या सैकड़ों संदेशों की अनदेखी की। अकोइजाम ने विश्वविद्यालय की जांच व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि संस्थागत प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को दबाव में लाने के लिए नहीं होना चाहिए।

अकोइजाम ने आरोप लगाया कि मणिपुर के मुद्दे पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक सांसद होने के नाते वह राज्य के लोगों की समस्याओं को उठाते रहेंगे।

हालांकि, यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोपों और विश्वविद्यालय की जांच के निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी पक्ष के दावे को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। फिलहाल, अकोइजाम आरोपों से इनकार कर रहे हैं और कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बता रहे हैं। मामले में विश्वविद्यालय की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े सभी तथ्यों को समझना आगे की स्थिति स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।