भारत का Semiconductor Mission: Chip Manufacturing में कितनी बड़ी छलांग?

भारत अब सेमीकंडक्टर यानी चिप निर्माण के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। India Semiconductor Mission के तहत देश में चिप डिजाइन से लेकर fabrication, assembly और packaging तक पूरा ecosystem तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। जुलाई 2026 में सरकार ने Semicon 2.0 को मंजूरी दी, जिसके लिए ₹1,27,500 करोड़ का बजट रखा गया है।इस मिशन के तहत अब तक 12 semiconductor manufacturing projects को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें कुल निवेश ₹1.64 लाख करोड़ से ज्यादा है। इनमें गुजरात, असम, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में अलग-अलग तरह की semiconductor facilities शामिल हैं। सरकार के अनुसार Micron, Kaynes और CG Power की इकाइयों में commercial production भी शुरू हो चुका है।

भारत की सबसे बड़ी परियोजनाओं में Tata Electronics का गुजरात के धोलेरा में semiconductor fabrication plant शामिल है। इस परियोजना में करीब ₹91,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है और इसकी क्षमता लगभग 50,000 wafer starts per month बताई गई है। वहीं Micron की गुजरात इकाई memory और storage products की assembly और testing पर काम कर रही है।Semiconductor manufacturing का विस्तार भारत के लिए सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि इससे रोजगार, electronics manufacturing और supply-chain development को भी बढ़ावा मिल सकता है। मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, AI systems, telecom equipment, defence और medical devices जैसे कई क्षेत्रों में chips की अहम भूमिका है। सरकार का लक्ष्य भारत को केवल chip-design hub नहीं, बल्कि एक complete semiconductor manufacturing ecosystem के रूप में विकसित करना है।

हालांकि चुनौती भी बड़ी है। Semiconductor industry में भारी निवेश, अत्याधुनिक तकनीक, skilled workforce, reliable power और पानी जैसी सुविधाओं की जरूरत होती है। इसके बावजूद लगातार नए projects और Semicon 2.0 के जरिए भारत अपनी chip manufacturing क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अगर ये योजनाएं तय समय पर आगे बढ़ती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत global semiconductor supply chain में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।