भारतीय वायुसेना के परिवहन बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की लागत से 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है। इन विमानों का इस्तेमाल सैनिकों, सैन्य उपकरणों, हथियारों और जरूरी सामान को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाएगा।
इस योजना का सबसे अहम उद्देश्य वायुसेना के पुराने AN-32 परिवहन विमानों को धीरे-धीरे नए और आधुनिक विमानों से बदलना है। AN-32 लंबे समय से भारतीय वायुसेना के परिवहन बेड़े का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। नए विमानों के आने से वायुसेना की एयरलिफ्ट क्षमता बढ़ेगी और ऊंचाई वाले तथा दुर्गम इलाकों में सैन्य जरूरतों को पूरा करना आसान होगा।
प्रस्तावित विमानों में करीब 18 से 30 टन तक सामान ले जाने की क्षमता होने की उम्मीद है। इन्हें ऐसे क्षेत्रों में भी इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया जाएगा, जहां रनवे की सुविधाएं सीमित हैं। इससे देश के सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों और सैन्य सामान की तेज आवाजाही में मदद मिलेगी।
इस पूरी योजना में ‘मेक इन इंडिया’ पर भी खास जोर दिया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक 60 में से 12 विमान तैयार हालत में भारत लाए जा सकते हैं, जबकि बाकी 48 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इसके साथ ही विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल की सुविधाएं भी देश में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
इस परियोजना में भारतीय कंपनियों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी। भारतीय कंपनियां विदेशी विमान निर्माताओं के साथ साझेदारी करके इस कार्यक्रम में हिस्सा ले सकती हैं। संभावित विमानों में C-130J Super Hercules, Embraer C-390 Millennium और Airbus A400M जैसे विमान शामिल हैं। हालांकि, अंतिम फैसला चयन और परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।
60 नए परिवहन विमानों की यह योजना भारतीय वायुसेना की लॉजिस्टिक और एयरलिफ्ट क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भी अहम मानी जा रही है। इससे आने वाले वर्षों में वायुसेना के परिवहन बेड़े को ज्यादा आधुनिक, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल सकती है।





