बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। छात्र आंदोलन और हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया, जबकि सत्तापक्ष ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। बढ़ते शोर-शराबे के कारण विधानसभा अध्यक्ष को कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
हंगामे के दौरान नारेबाजी और तीखी बहस के बीच स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि सदन की व्यवस्था बनाए रखने के लिए मार्शलों को बुलाना पड़ा। बीजेपी विधायक विनय बिहारी ने आरोप लगाया कि विपक्षी सदस्यों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन पर हमला करने की कोशिश की। वहीं विपक्ष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सरकार पर मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
विपक्ष का कहना था कि छात्र आंदोलन, परीक्षा संबंधी विवाद और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। दूसरी ओर सरकार ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही नहीं चलने देना चाहता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित कर रहा है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर पूरे दिन चलता रहा।
लगातार हंगामे के बीच अध्यक्ष ने सदन में शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके चलते कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। इस बीच सरकार ने सदन में अनुपूरक बजट भी पारित कराया और वित्तीय संकट के विपक्ष के आरोपों को खारिज किया।
मानसून सत्र के अंतिम दिन का यह घटनाक्रम बिहार की राजनीति में बढ़ते टकराव का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलन और अन्य जनहित के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव आने वाले दिनों में भी जारी रह सकता है। विधानसभा का समापन भले ही हो गया हो, लेकिन सदन के भीतर उठे मुद्दों की गूंज अब राजनीतिक गलियारों में लंबे समय तक सुनाई देने की संभावना है।




