बंगाल में फिश भोग पर विवाद के बीच शुभेंदु अधिकारी का जवाब, बोले- क्या विवाद है? पूजा के बाद मैंने भी खाया

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान नॉनवेज खाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल की धार्मिक और खानपान परंपराओं का बचाव किया है। कोलकाता के कालीघाट मंदिर में पूजा करने के बाद मछली का भोग ग्रहण करने वाले अधिकारी ने कहा कि बंगाल में अलग-अलग धार्मिक परंपराएं हैं और लोगों को अपनी पसंद का भोजन चुनने की संवैधानिक आजादी है। उन्होंने सवाल किया, “इसमें विवाद क्या है?”

अधिकारी ने यह बात शनिवार को कोलकाता में आयोजित News18 Rising Bharat Summit में कही। उन्होंने बताया कि कौशिकी अमावस्या के अवसर पर कालीघाट मंदिर में पूजा के बाद उन्होंने मछली और बासंती पुलाव का भोग ग्रहण किया था। उनके मुताबिक, यह मंदिर की परंपरा के अनुसार दिया गया प्रसाद था।

शुभेंदु अधिकारी ने अपनी धार्मिक मान्यताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि महाष्टमी के दिन वह सात्त्विक भोजन करते हैं और कार्तिक महीने में भी सात्त्विक आहार लेते हैं। लेकिन मां काली को बंगाली परंपरा के अनुसार चढ़ाए जाने वाले मांसाहारी भोग को वह प्रसाद के रूप में स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धार्मिक अवसरों की अपनी-अपनी परंपराएं होती हैं और उन्हें उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

यह बयान बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हालिया अपील के बाद शुरू हुए विवाद के बीच आया है। शास्त्री ने बंगाल के लोगों से दुर्गा पूजा और नवरात्रि के दौरान नॉनवेज भोजन से दूर रहने की अपील की थी। उनके बयान के बाद बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई। कई नेताओं ने कहा कि बंगाल की अपनी खानपान और धार्मिक परंपराएं हैं और किसी बाहरी व्यक्ति को लोगों की भोजन की आदत तय करने का अधिकार नहीं है।

इसी विवाद के बीच कालीघाट मंदिर में अधिकारी के मछली भोग ग्रहण करने को राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा गया। रिपोर्टों के मुताबिक, उनकी थाली में मछली का सिर, तली हुई मछली और बासंती पुलाव था। बीजेपी ने भी अधिकारी के इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह बंगाल की लंबे समय से चली आ रही शाक्त परंपराओं का हिस्सा है।

अधिकारी ने धर्म और व्यक्तिगत पसंद के बीच अंतर बताते हुए कहा कि धार्मिक गुरु या संत लोगों को अपनी मान्यताओं के अनुसार सलाह दे सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला व्यक्ति का अपना होता है। उन्होंने संविधान में मिले भोजन चुनने के अधिकार का भी उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने बंगाल को भारत की सांस्कृतिक राजधानी बताते हुए राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की बात कही।

बंगाल में मछली का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी इस बहस का अहम हिस्सा है। कालीघाट जैसे शाक्त परंपरा वाले मंदिरों में मछली और बकरे के मांस का भोग चढ़ाने की परंपरा रही है। कई पुराने बंगाली परिवारों ने भी हालिया विवाद के बावजूद अपनी पारंपरिक पूजा में मछली के भोग को जारी रखने की बात कही है।

इस तरह शुभेंदु अधिकारी का बयान और कालीघाट में मछली का भोग ग्रहण करना बंगाल की धार्मिक विविधता और खानपान की परंपरा को लेकर चल रही बहस में नया राजनीतिक मोड़ ले आया है। एक तरफ धीरेंद्र शास्त्री की नॉनवेज से दूर रहने की अपील है, वहीं दूसरी तरफ बंगाल के नेता और पारंपरिक पूजा करने वाले परिवार अपनी स्थानीय परंपराओं का हवाला दे रहे हैं। अब यह विवाद धार्मिक आस्था के साथ-साथ बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा भी बन गया है।