फ्रांस में स्कूलों की लंबी समय-सारणी, शिक्षकों की कमी और कक्षाओं में बढ़ती भीड़ के खिलाफ हाई स्कूल के छात्रों का प्रदर्शन तेज हो गया है। पिछले सप्ताह पेरिस क्षेत्र से शुरू हुआ आंदोलन अब देश के कई शहरों तक फैल चुका है। बुधवार को 356 स्कूलों में विरोध प्रदर्शन और ब्लॉकेड की स्थिति बनी रही, जबकि पुलिस ने 625 लोगों को हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन शुरू होने के बाद छात्रों और स्कूल कर्मचारियों समेत 119 लोग घायल हुए हैं।
छात्रों की मुख्य शिकायतों में लंबे स्कूल घंटे, बड़ी कक्षाएं और शिक्षकों की कमी शामिल है। कई छात्रों ने यह भी शिकायत की है कि हालिया गर्मी की लहरों के दौरान स्कूलों की कक्षाएं बेहद गर्म हो गई थीं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों के बाहर ऐसे पोस्टर लगाए जिनमें सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक की पढ़ाई को लेकर नाराजगी जताई गई।प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। लिली, पेरिस, बोर्डो, ल्योन, मार्सेई और अन्य शहरों में छात्रों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। कुछ स्थानों पर कूड़ेदानों में आग लगाने, पुलिस पर बोतलें और अन्य वस्तुएं फेंकने तथा स्कूल परिसरों को ब्लॉक करने की घटनाएं सामने आईं। पुलिस ने कुछ जगहों पर आंसू गैस और अन्य भीड़ नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किया।
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस को निशाना बनाए जाने, वस्तुएं फेंके जाने, हिंसा और आगजनी के प्रयासों की आलोचना की है। अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार की कार्रवाई में 83 पुलिसकर्मी और जेंडार्म घायल हुए। वहीं शिक्षा मंत्री एडुआर जॉफ्रे ने कहा कि छात्रों और स्कूल कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए स्कूलों में सामान्य स्थिति बहाल करना जरूरी है।
छात्रों और उनके समर्थकों का कहना है कि विरोध केवल लंबी पढ़ाई की अवधि को लेकर नहीं है, बल्कि स्कूलों में संसाधनों की कमी, शिक्षकों की कमी और खराब बुनियादी सुविधाओं से भी जुड़ा है। कुछ छात्रों ने कक्षाओं में करीब 34 विद्यार्थियों के होने और शिक्षकों पर बढ़ते काम के दबाव की शिकायत की है। दूसरी ओर, सरकार ने हिंसक घटनाओं से दूरी बनाते हुए कहा है कि छात्रों की शिक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए।
यह छात्र आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है जब फ्रांस में सरकारी बजट को लेकर भी व्यापक विरोध प्रदर्शन और सार्वजनिक क्षेत्र की हड़तालें चल रही हैं। स्कूलों में जारी विरोध और व्यापक सामाजिक आंदोलनों के बीच सरकार पर शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों तथा कानून-व्यवस्था दोनों को संभालने का दबाव बढ़ा है। फिलहाल कई शहरों में स्कूल ब्लॉकेड और विरोध प्रदर्शन जारी हैं।





