फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के बीच सवाल उठे हैं। फॉर्म 6 नए मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए इस्तेमाल होता है। SIR के दौरान इसमें एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी, जिसमें आवेदक से उसके या परिवार के सदस्यों के पुराने वोटर लिस्ट में नाम की जानकारी मांगी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर 2026 को कहा कि उसने फॉर्म 6 के इस संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी थी। कोर्ट ने चुनाव आयोग से रिकॉर्ड मांगा है कि यह बदलाव किसने और किस अधिकार के तहत किया।
फॉर्म 7 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट से नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए होता है, जबकि फॉर्म 8 मौजूदा मतदाता की जानकारी में सुधार, पता बदलने या वोटर आईडी से जुड़े बदलाव के लिए होता है।
फॉर्म 6, 7 और 8 का कानूनी आधार Registration of Electors Rules, 1960 में है। इसलिए फॉर्म में बदलाव को लेकर यह सवाल अहम है कि चुनाव आयोग अपने स्तर पर बदलाव कर सकता है या इसके लिए नियमों में संशोधन जरूरी है। इस मुद्दे पर अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के फैसले के बाद स्पष्ट होगी।





