फसल ही नहीं, बिजली बेचकर भी कमाई कर रहे बिजनौर के किसान, रोज बन रही 1.60 लाख यूनिट बिजली

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में किसान अब सिर्फ खेतों में फसल उगाकर ही नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा के जरिए बिजली बनाकर भी अपनी आय बढ़ा रहे हैं। जिले में किसानों ने अपनी जमीन पर सोलर पावर प्लांट लगाए हैं, जिनसे हर दिन करीब 1.60 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इस पहल से किसानों को खेती के अलावा कमाई का एक अतिरिक्त जरिया मिला है।

बिजनौर में करीब 15 किसानों के खेतों में 40 मेगावाट क्षमता के सोलर बिजलीघर स्थापित हो चुके हैं। किसान प्रधानमंत्री कुसुम योजना समेत सौर ऊर्जा से जुड़ी योजनाओं का लाभ लेकर अपनी जमीन पर सोलर प्लांट लगा रहे हैं। इन प्लांटों में तैयार होने वाली बिजली को ग्रिड में भेजा जाता है और तय दर के अनुसार इसकी खरीद की जाती है।

बिजनौर के किसान सुशील त्यागी इसका एक उदाहरण हैं। उन्होंने करीब 48 बीघा जमीन में से 45 बीघा पर 3 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया है। इस प्लांट को तैयार करने में करीब 10.5 करोड़ रुपये की लागत आई। प्लांट से बड़े स्तर पर बिजली का उत्पादन हो रहा है और उत्पादित बिजली की बिक्री से किसान को अतिरिक्त आमदनी मिल रही है। हालांकि, प्लांट के संचालन और रखरखाव पर भी हर महीने खर्च आता है।

सौर ऊर्जा की ओर किसानों के बढ़ते रुझान के पीछे खेती में बढ़ती लागत, मजदूरों की कमी और अतिरिक्त आय की जरूरत जैसे कारण भी बताए जा रहे हैं। सोलर प्लांट किसानों को अपनी जमीन से लंबे समय तक आय का एक वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं। वहीं, इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी मदद मिलती है।

बिजनौर में सौर ऊर्जा का यह बढ़ता मॉडल खेती के साथ ऊर्जा उत्पादन की नई तस्वीर पेश कर रहा है। किसान अब ‘अन्नदाता’ के साथ ‘ऊर्जादाता’ की भूमिका भी निभा रहे हैं। आने वाले समय में सोलर परियोजनाओं के विस्तार से जिले में बिजली उत्पादन और किसानों की अतिरिक्त आय, दोनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।