प्लास्टिक अब कचरा नहीं! वैज्ञानिकों ने खोजा पेट्रोल-डीजल बनाने का तरीका

दुनियाभर में बढ़ते प्लास्टिक कचरे की समस्या के बीच वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक पर सफलता हासिल की है, जिसके जरिए बेकार प्लास्टिक को उपयोगी ईंधन में बदला जा सकता है। हालिया शोध में प्लास्टिक कचरे को विशेष प्रक्रिया के जरिए पेट्रोल और डीजल जैसे तरल ईंधन में बदलने का सफल प्रयोग किया गया है। इस तकनीक को प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के साथ-साथ कचरे से ऊर्जा हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्लास्टिक से liquid fuel बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने नियंत्रित तापमान और उत्प्रेरक यानी catalyst की मदद से प्लास्टिक की लंबी polymer chains को छोटे hydrocarbon molecules में तोड़ा। इसे broadly pyrolysis या catalytic conversion जैसी प्रक्रियाओं के तहत किया जाता है।

इस प्रक्रिया में प्लास्टिक को ऑक्सीजन की बेहद कम या नियंत्रित मौजूदगी में गर्म किया जाता है। गर्म होने पर प्लास्टिक टूटकर अलग-अलग hydrocarbon products में बदलता है, जिनमें liquid fuel भी शामिल हो सकता है। इसके बाद इस liquid product को आगे refine और upgrade करके पेट्रोल या डीजल जैसे ईंधन के लिए इस्तेमाल किए जाने योग्य बनाया जा सकता है। कुछ हालिया प्रयोगों में catalyst की मदद से अपेक्षाकृत कम तापमान पर gasoline-range fuel की अच्छी मात्रा हासिल करने की रिपोर्ट भी सामने आई है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि लैब में तैयार हुआ fuel सीधे पेट्रोल पंप पर मिलने वाले standard petrol या diesel के बराबर नहीं माना जा सकता; इसके लिए आगे purification, quality testing और बड़े स्तर पर validation की जरूरत होती है।

वैज्ञानिकों की यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्लास्टिक सामान्य परिस्थितियों में बहुत धीरे टूटता है और बड़ी मात्रा में कचरा landfill, नदियों और समुद्रों तक पहुंचता है। अगर ऐसी तकनीक को सुरक्षित और आर्थिक तरीके से बड़े स्तर पर विकसित किया जाता है, तो इससे प्लास्टिक कचरे को एक उपयोगी संसाधन में बदलने और fossil fuels की कुछ मांग को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस तकनीक के सामने लागत, ऊर्जा की जरूरत, अलग-अलग तरह के प्लास्टिक की processing और emissions control जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। खासकर PVC जैसे कुछ plastics को अलग तरीके से संभालना जरूरी हो सकता है, क्योंकि इनके processing के दौरान हानिकारक पदार्थ बन सकते हैं। इसलिए वैज्ञानिकों के लिए अगली चुनौती इस प्रक्रिया को laboratory से industrial scale तक सुरक्षित, कम लागत वाली और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर बनाना है।