कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेंगलुरु में पेड़ की एक भारी डाल गिरने से गंभीर रूप से घायल हुए 38 वर्षीय चंदन जी को करीब 2.77 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी को यह राशि तीन सप्ताह के भीतर अदा करने का निर्देश दिया। अदालत के आदेश के मुताबिक, मुआवजे पर 7 मार्च 2024 से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
यह हादसा 7 मार्च 2024 को हुआ था। चंदन उस समय बेंगलुरु की रिचमंड रोड से कार्यालय जा रहे थे। इसी दौरान गुड शेफर्ड कॉन्वेंट स्कूल परिसर में मौजूद गुलमोहर के पेड़ की एक शाखा सड़क की ओर गिर गई और उनके गर्दन के हिस्से पर जा गिरी। हादसे में उनकी रीढ़ और गर्दन में गंभीर चोटें आईं और बाद में उन्हें 85 प्रतिशत स्थायी विकलांगता का सामना करना पड़ा।
हादसे के बाद चंदन को अस्पताल में लंबे समय तक इलाज और पुनर्वास से गुजरना पड़ा। अदालत के समक्ष पेश जानकारी के अनुसार, इलाज पर करीब 26 लाख रुपये खर्च हुए। चोटों के कारण उनकी काम करने की क्षमता भी बुरी तरह प्रभावित हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के बाद नगर निकाय की ओर से 5 लाख रुपये और स्कूल प्रबंधन की ओर से 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई थी, लेकिन चंदन ने भविष्य के इलाज और परिवार की जरूरतों को देखते हुए अधिक मुआवजे की मांग की थी।
मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि हादसे से कुछ समय पहले स्कूल ने नगर निकाय को पेड़ की उस शाखा के बारे में लिखित रूप से सूचित किया था। स्कूल ने कथित तौर पर 16 फरवरी 2024 को शिकायत दी थी, जिसे 22 फरवरी को संबंधित निकाय के पास जमा किया गया था। पत्र में शाखा के सड़क की ओर बढ़े होने और उसके टूटकर गिरने से बच्चों, राहगीरों और वाहनों को खतरा होने की बात कही गई थी। इसके बावजूद हादसे से पहले शाखा को हटाने या काटने की कार्रवाई नहीं हुई।
हाई कोर्ट ने इसी तरह के सार्वजनिक सुरक्षा जोखिमों से निपटने के लिए अधिकारियों को कई सामान्य निर्देश भी दिए हैं। अदालत का आदेश सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे संभावित खतरों की पहचान, उनकी जानकारी दर्ज करने और समय पर कार्रवाई की व्यवस्था से जुड़ा है। मामले में अदालत ने नागरिक प्रशासन की जिम्मेदारी और सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित दायित्वों पर भी विचार किया।
अदालत के आदेश के बाद चंदन को मिलने वाली कुल राशि करीब 2.77 करोड़ रुपये होगी, जिसमें निर्धारित मुआवजे के साथ ब्याज भी शामिल प्रक्रिया का हिस्सा है। यह मामला बेंगलुरु में पेड़ों की देखभाल और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों के बीच सामने आया है।





