यमन के हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बीच सऊदी अरब की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान द्वारा यमन में सीधे सैन्य अभियान का हिस्सा बनने से इनकार किए जाने के बाद अब रियाद ने इजरायल से भी अप्रत्यक्ष मदद की संभावना तलाशनी शुरू कर दी है। इजरायल और सऊदी अरब के बीच अमेरिका की मध्यस्थता से हूती खतरे को लेकर बातचीत होने की खबर है।
India Today की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के जरिए इजरायल से बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से जुड़े खतरों पर खुफिया जानकारी मांगी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इजरायल की संभावित मदद मुख्य रूप से इंटेलिजेंस शेयरिंग तक सीमित रह सकती है, न कि सीधे सैन्य हमले तक।
सऊदी अरब के लिए बाब अल-मंदब बेहद महत्वपूर्ण है। यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम मार्ग है। हूतियों ने जुलाई में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की थी। इसके बाद सऊदी तेल निर्यात और लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।सऊदी अरब की परेशानी इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि पाकिस्तान, जिसके साथ रियाद का पारस्परिक रक्षा समझौता है, कथित तौर पर अपनी सेना को यमन में सीधे लड़ाई के लिए भेजने से पीछे हट रहा है। इस्लामाबाद का रुख यह बताया गया है कि वह सऊदी क्षेत्र की रक्षा में मदद कर सकता है, लेकिन विदेशी जमीन पर हूतियों के खिलाफ सीधे युद्ध में शामिल होना जरूरी नहीं मानता।
दिलचस्प बात यह है कि सऊदी अरब और इजरायल के बीच अभी औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। ऐसे में हूतियों के खिलाफ सुरक्षा और खुफिया सहयोग की खबरें क्षेत्र की बदलती रणनीतिक स्थिति को दिखाती हैं। हालांकि, इसे सऊदी अरब और इजरायल के बीच किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी।
हूतियों ने हाल के दिनों में सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। अल जजीरा के मुताबिक, सितंबर में हुए हमलों में दर्जनों लोग घायल हुए और कई शहरों में तेल से जुड़े प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा। इसके बाद हूती लड़ाके यमन के लाल सागर तट पर आगे बढ़े और बाब अल-मंदब के आसपास उनकी गतिविधियां बढ़ गईं। हालांकि, जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण का हूतियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पाकिस्तान ने दूसरी ओर हूती हमलों की निंदा करते हुए सऊदी अरब की सुरक्षा और संप्रभुता के समर्थन की बात कही है। इस्लामाबाद ने जुलाई में स्पष्ट किया था कि सऊदी अरब या उसके वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ हमलों को गंभीर खतरे के रूप में देखा जाएगा। लेकिन बयानबाजी और प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप के बीच अंतर बना हुआ है।
ऐसे में सऊदी अरब के सामने एक जटिल स्थिति है। अमेरिका सीधे हमले से दूरी बनाए हुए है, पाकिस्तान विदेशी जमीन पर सैन्य कार्रवाई से पीछे हट रहा है और हूती लाल सागर क्षेत्र में दबाव बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि इजरायल से संभावित खुफिया सहयोग की खबर को रियाद की बदलती रणनीति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इजरायल द्वारा सऊदी अरब को किसी प्रत्यक्ष सैन्य सहायता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।





