नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद रसुवा जिले में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बाढ़ और मलबे से प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए नेपाली सेना और विशेषज्ञ टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं।
रसुवा के चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में भी बचाव अभियान शुरू किया गया है। सुरंग के अंदर बाढ़ का पानी और मलबा भरने के कारण वहां मौजूद लोगों की सही संख्या का पता लगाना चुनौती बना हुआ है। मंगलवार सुबह हेलीकॉप्टर से पहुंची रेस्क्यू टीम ने सुरंग के भीतर प्रवेश कर खोज अभियान शुरू किया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे के समय सुरंग में करीब 25-30 लोग मौजूद हो सकते थे, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित
बाढ़ ने रसुवा और नुवाकोट जिलों में कई जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। अपर त्रिशूली-3A, अपर त्रिशूली-3B, चिलिमे और लैंगटांग खोला जैसी परियोजनाओं में मजदूरों के लापता होने की खबरें सामने आई हैं। कुछ सुरंगों के प्रवेश द्वार भारी मात्रा में मिट्टी, चट्टानों और मलबे से बंद हो गए हैं।
नेपाली सेना ने विभिन्न हाइड्रोपावर साइटों पर अब तक सैकड़ों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। वहीं, कई स्थानों पर सुरंगों के अंदर पानी और गाद हटाने के लिए पंप, ड्रिलिंग मशीन और भारी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारत और चीन की टीमें भी मदद में जुटीं
बचाव अभियान में नेपाल को पड़ोसी देशों से भी तकनीकी सहायता मिल रही है। भारतीय और नेपाली टीमें रसुवा की चिलिमे और लैंगटांग परियोजनाओं में सुरंगों तक पहुंच बनाने के लिए मिलकर काम कर रही हैं, जबकि कुछ अन्य साइटों पर चीनी विशेषज्ञ भी बचाव कार्य में शामिल हैं।
समय के खिलाफ रेस्क्यू ऑपरेशन
सुरंगों में लंबे समय से फंसे लोगों के लिए समय बेहद महत्वपूर्ण है। मलबे से रास्ते बंद होने, ऑक्सीजन, पानी और भोजन की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सुरंग के अंदर फंसे लोगों की जान बचाने के लिए जल्द से जल्द सुरक्षित रास्ता बनाना जरूरी है।
नेपाल में आई इस आपदा ने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया है। इसके बावजूद राहत और बचाव टीमें कठिन मौसम, पहाड़ी इलाके और भारी मलबे के बीच लगातार अभियान चला रही हैं। रसुवा में सुरंगों के भीतर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश अब भी जारी है और परिवार अपने लापता परिजनों के सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।





