नेपाल की सुरंग में 10 दिन फंसे इंजीनियर की ‘दूसरी जिंदगी’, अंधेरे में मंत्र जपकर बची उम्मीदनेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और

भूस्खलन के बाद त्रिशूली नदी क्षेत्र में तबाही का मंजर देखने को मिला। इसी दौरान Upper Trishuli-3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे दो कर्मचारियों को करीब 10 दिन बाद जिंदा बाहर निकाल लिया गया। इनमें 30 वर्षीय मैकेनिकल फोरमैन संजय साह भी शामिल हैं, जिन्होंने सुरंग के अंधेरे में जिंदगी और मौत के बीच बिताए दिनों की कहानी बताई है।

संजय साह के मुताबिक, जब बाढ़ का पानी और मलबा सुरंग में तेजी से घुसने लगा, तब वह प्रोजेक्ट के कंट्रोल रूम में मौजूद थे। उस समय साइट पर करीब 40 से 45 कर्मचारी थे। संजय ने बताया कि उनकी जिम्मेदारी सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी। उन्होंने दूसरे कर्मचारियों को तुरंत भागने के लिए कहा और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश करते रहे। लेकिन इसी दौरान उनका अपना रास्ता बंद हो गया और वह सुरंग के भीतर फंस गए।संजय ने बताया कि उन्होंने अपनी जान बचाने से पहले दूसरे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सभी को बाहर जाने के लिए कहने में उनका काफी समय निकल गया और आखिर में वह खुद सुरंग से बाहर नहीं निकल सके। इसके बाद उनके सामने कई दिनों तक अंधेरे में अकेले या सीमित लोगों के साथ जीवित रहने की चुनौती थी।

इस मुश्किल समय में संजय ने उम्मीद नहीं छोड़ी। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने सुरंग के भीतर भगवान कृष्ण का महामंत्र जपते हुए समय बिताया। अंधेरे और अनिश्चितता के बीच यही उनका मानसिक सहारा बना रहा। बाद में जब बचाव दल उन तक पहुंचा तो संजय को बाहर निकालते हुए सुरक्षाकर्मियों ने उनसे कहा कि उन्हें ‘दूसरी जिंदगी’ मिली है।बचाव अभियान के दौरान सुरंग के भीतर फंसे लोगों से संपर्क स्थापित करना बेहद मुश्किल था। सुरंग के प्रवेश मार्ग पर भारी मात्रा में मिट्टी, चट्टान और मलबा जमा था। बचाव दल ने भारी मशीनरी और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से रास्ता बनाने का काम किया। शुक्रवार सुबह सुरंग के भीतर से आवाजें सुनाई देने के बाद उम्मीद जगी कि कुछ लोग अभी जिंदा हो सकते हैं।संजय के साथ 45 वर्षीय कबीर महारजन को भी सुरंग से जिंदा बाहर निकाला गया। दोनों करीब 170 मीटर की गहराई में मिले थे। संजय की हालत स्थिर बताई गई है, जबकि कबीर की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

संजय ने बचाव दल को यह भी बताया कि उनके आसपास तीन-चार अन्य लोगों से आवाज या बातचीत के जरिए संपर्क हुआ था। उन्होंने आशंका जताई कि सुरंग के और गहरे हिस्सों में भी लोग फंसे हो सकते हैं। सुरंग काफी लंबी है और बाढ़ का तेज बहाव लोगों को अंदर तक ले गया हो सकता है। इसलिए दोनों कर्मचारियों के जिंदा मिलने के बाद भी बचाव अभियान को रोकने के बजाय और तेज कर दिया गया है।इस पूरी घटना ने नेपाल में जारी बचाव अभियान को नई उम्मीद दी है। बाढ़ और मलबे से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबरें हैं। ऐसे में संजय साह और कबीर महारजन का करीब 10 दिन बाद जिंदा मिलना राहतकर्मियों और उनके परिवारों के लिए बेहद भावुक क्षण है। संजय के लिए यह सिर्फ एक सफल रेस्क्यू नहीं, बल्कि सचमुच जिंदगी का दूसरा मौका है।