नई दिल्ली: उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के चीन के अचानक दौरे ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, किम जोंग उन 24 अक्टूबर 2026 को नए यालू नदी पुल के रास्ते चीन के सीमावर्ती शहर डांडोंग पहुंचे। यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब चीन और उत्तर कोरिया अपने आपसी संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
किम जोंग उन की इस यात्रा में नए पुल की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। करीब तीन किलोमीटर लंबा और चार लेन वाला यालू नदी पुल चीन के डांडोंग शहर को उत्तर कोरिया के सिनुइजू शहर से जोड़ता है। इसका निर्माण 2014 में पूरा हो गया था, लेकिन सीमा से जुड़ी सुविधाएं तैयार नहीं होने के कारण लंबे समय तक इसका इस्तेमाल शुरू नहीं हो सका। 15 अक्टूबर 2026 को इसे यातायात के लिए खोला गया।
चीन और उत्तर कोरिया के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं।चीन, उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ऐसे में नए पुल के शुरू होने से दोनों देशों के बीच सामान की आवाजाही आसान होने और व्यापार बढ़ने की उम्मीद है। किम जोंग उन का इस मार्ग से चीन पहुंचना दोनों देशों के बीच संपर्क और सहयोग के लिहाज से खास माना जा रहा है।
इस दौरे का समय भी महत्वपूर्ण है। 25 अक्टूबर को कोरियाई युद्ध के दौरान चीन की सेना के शामिल होने की वर्षगांठ मनाई जाती है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया के साथ बातचीत की संभावनाओं को लेकर प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में किम जोंग उन की चीन यात्रा का असर क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है।
हालांकि, किम जोंग उन की इस यात्रा का पूरा कार्यक्रम अभी स्पष्ट नहीं है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनकी मुलाकात होगी या नहीं, इसे लेकर भी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर इस बात पर है कि इस दौरे से चीन और उत्तर कोरिया के संबंधों को कितनी मजबूती मिलती है और क्षेत्रीय राजनीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।





