दिवाली से पहले चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। पिछले छह दिनों में चीनी के थोक दाम 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गए हैं। त्योहारों के मौसम में मिठाइयों की मांग बढ़ने के बीच कीमतों में इस उछाल से आम लोगों और मिठाई कारोबारियों पर असर पड़ सकता है। दिवाली के दौरान घरों में मिठाइयां बनाने से लेकर बाजार में मिठाइयों की बिक्री तक, हर जगह चीनी की मांग बढ़ जाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों से बिक्री की कीमत 6 अक्टूबर को 4,600 रुपये प्रति क्विंटल थी, जो 12 अक्टूबर तक बढ़कर 5,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। वहीं, महाराष्ट्र में चीनी के दाम 4,350 रुपये से बढ़कर 5,100 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गए। इस तरह उत्तर प्रदेश में करीब 13 प्रतिशत और महाराष्ट्र में लगभग 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, ये थोक कीमतें हैं और खुदरा बाजार में ग्राहकों को चीनी अलग-अलग दामों पर मिल सकती है।
चीनी की कीमतों में इस तेजी के पीछे बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति को प्रमुख वजह माना जा रहा है। दिवाली नजदीक आने के कारण मिठाई कारोबारियों की खरीद बढ़ रही है। वहीं, गन्ने की फसल और चीनी उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों के कारण बाजार में आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, चीनी के भंडारण और बाजार में उपलब्धता से जुड़ी समस्याएं भी कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं।
कीमतों पर नियंत्रण रखने और बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने भी कदम उठाए हैं। सरकार ने अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े के लिए चीनी मिलों को घरेलू बाजार में बिक्री के लिए 14 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया है। इसके साथ ही, चीनी आयात करने वाली कंपनियों के लिए दो लाख टन का अतिरिक्त कोटा तय किया गया है। सरकार ने जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए व्यापारियों के स्टॉक की सीमा भी तय की है। 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक व्यापारी अधिकतम 1,000 क्विंटल चीनी का स्टॉक रख सकेंगे, जिस पर निर्धारित अवधि के नियम लागू होंगे।
दूसरी ओर, नई फसल की पेराई में देरी की आशंका से भी चीनी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ इलाकों में गन्ने की कटाई को लेकर चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में बाजार में नई चीनी पहुंचने में समय लग सकता है। अगर मांग बढ़ती रही और आपूर्ति पर्याप्त नहीं हुई, तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, आने वाले दिनों में चीनी के दाम किस दिशा में जाएंगे, यह बाजार में उपलब्धता और सरकार के कदमों के असर पर निर्भर करेगा।





