दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जा रहे 60 वकील हिरासत में, CJI सूर्यकांत के निर्देश पर तुरंत छोड़े गए

दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट के आसपास प्रदर्शन कर रहे करीब 60 वकीलों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में वरिष्ठ वकीलों के साथ महिला वकील भी शामिल थीं। मामला सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने इस कार्रवाई पर चिंता जताई और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप राय ने वकीलों को हिरासत में लिए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि वकीलों को मनमाने तरीके से हिरासत में लेना और डराना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसोसिएशन की मानद सचिव प्रज्ञा बघेल ने भी CJI सूर्यकांत को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। पत्र में हिरासत में लिए गए सभी वकीलों की सुरक्षा, उनकी स्थिति की जानकारी और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई।

मामले की जानकारी मिलने के बाद CJI सूर्यकांत ने संबंधित अधिकारियों से वकीलों को तुरंत रिहा करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता देवव्रत ने भी इस मामले को CJI के सामने उठाया। इसके बाद दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने वकीलों को रिहा करने का भरोसा दिया। कुछ ही समय बाद हिरासत में लिए गए वकीलों की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो गई और उन्हें छोड़ दिया गया।

यह पूरा मामला कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ा है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया था। यह विरोध मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर किया जाना था। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई थी और पुलिस ने बैरिकेडिंग सहित कई कदम उठाए थे।

वकीलों को हिरासत में लिए जाने की घटना के बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और लोगों के अधिकारों को लेकर सवाल उठे हैं। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने हिरासत की परिस्थितियों और कथित बल प्रयोग की जांच कराने की भी मांग की है। CJI सूर्यकांत के हस्तक्षेप के बाद वकीलों की रिहाई से मामले में तत्काल राहत मिली, हालांकि हिरासत की परिस्थितियों को लेकर उठे सवाल भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।