दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्यूटी-फ्री शॉप में परिवार के सभी सदस्यों के पासपोर्ट स्कैन किए जाने को लेकर एक अमेरिकी दंपति ने सवाल उठाए हैं। अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के इस दंपति ने सोशल मीडिया के जरिए अपने अनुभव को साझा करते हुए इसे संभावित ‘स्कैम’ बताया। दंपति के मुताबिक, वे दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर ड्यूटी-फ्री स्टोर पहुंचे थे, जहां खरीदारी के दौरान स्टोर के कर्मचारियों ने उनके परिवार के सदस्यों के पासपोर्ट स्कैन किए। परिवार में दो छोटे बच्चे भी शामिल थे। दंपति का कहना है कि उन्हें यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि परिवार के हर सदस्य का पासपोर्ट क्यों स्कैन किया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार के एक सदस्य ने ड्यूटी-फ्री स्टोर से शराब की एक बोतल खरीदी थी। इसी दौरान कर्मचारियों ने परिवार के अन्य सदस्यों के पासपोर्ट भी स्कैन किए। दंपति ने इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई और सवाल किया कि जब खरीदारी एक व्यक्ति के नाम पर हुई, तो परिवार के बाकी सदस्यों के दस्तावेजों की जानकारी लेने की जरूरत क्यों पड़ी। खास तौर पर बच्चों के पासपोर्ट स्कैन किए जाने को लेकर उन्होंने डेटा प्राइवेसी और व्यक्तिगत जानकारी के संभावित इस्तेमाल पर चिंता जाहिर की। हालांकि, इस मामले में किसी गलत इस्तेमाल की पुष्टि अभी नहीं हुई है और दंपति के आरोप स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं।
दंपति ने यह भी सवाल उठाया कि क्या पासपोर्ट स्कैन करने की प्रक्रिया का इस्तेमाल केवल खरीदारी और कस्टम नियमों का पालन करने के लिए किया गया था या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। उनके मुताबिक, यात्रियों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनका पासपोर्ट डेटा कब, क्यों और किस उद्देश्य से स्कैन किया जा रहा है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी यात्रियों के दस्तावेजों और निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर बहस शुरू हो गई है।हालांकि, एयरपोर्ट और ड्यूटी-फ्री अधिकारियों की ओर से इस मामले में अलग तस्वीर सामने आई है। अधिकारियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की खरीदारी से जुड़ी प्रक्रियाओं और कस्टम नियमों के पालन के लिए पासपोर्ट स्कैन करना निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। ड्यूटी-फ्री खरीदारी में यात्री की पहचान और यात्रा संबंधी जानकारी का रिकॉर्ड रखना कई मामलों में जरूरी होता है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि मामले की आंतरिक समीक्षा की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित स्टोर पर निर्धारित प्रक्रिया का सही तरीके से पालन हुआ था या नहीं।
इस विवाद ने एयरपोर्ट पर यात्रियों के डेटा की सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है। यात्रियों के लिए पासपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेजों में से एक है और इसमें संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी मौजूद होती है। ऐसे में किसी भी स्टोर, एजेंसी या सेवा प्रदाता द्वारा पासपोर्ट स्कैन किए जाने पर यात्री यह जानना चाहते हैं कि उस डेटा का इस्तेमाल किस उद्देश्य से होगा और उसे कितने समय तक सुरक्षित रखा जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यात्रियों को किसी भी असामान्य प्रक्रिया को लेकर संबंधित अधिकारियों से तुरंत स्पष्टीकरण मांगना चाहिए।
यह मामला फिलहाल आरोप और स्पष्टीकरण के स्तर पर है। दंपति ने जहां इसे संभावित धोखाधड़ी या डेटा के गलत इस्तेमाल से जोड़कर सवाल उठाए हैं, वहीं अधिकारियों ने इसे सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और मामले की जांच की बात कही है। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। इस घटना ने एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या एयरपोर्ट पर यात्रियों के दस्तावेजों की जांच और स्कैनिंग की प्रक्रिया इतनी पारदर्शी है कि यात्रियों को हर कदम की स्पष्ट जानकारी मिल सके?




