भारत ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ रक्षा सहयोग मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित पहले ASEAN-India Defence Think Tank Forum में कहा कि भारत आसियान देशों को ड्रोन, रडार, हेलिकॉप्टर और अन्य आधुनिक रक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के साथ रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग करने के लिए तैयार है। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और भारत की रक्षा क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल रक्षा उपकरणों की बिक्री तक सीमित नहीं है। भारत दूसरे देशों के साथ मिलकर रक्षा उपकरणों का निर्माण, नई तकनीक का विकास, प्रशिक्षण और रखरखाव जैसी सुविधाओं पर भी काम करना चाहता है। इससे आसियान देशों की रक्षा क्षमताओं को मजबूती मिलेगी और भारत के रक्षा उद्योग को भी नए अवसर मिलेंगे।
भारत ने समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति बनाए रखने पर भी जोर दिया। इस क्षेत्र में समुद्री व्यापार के महत्वपूर्ण रास्ते मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा भारत और आसियान देशों, दोनों के लिए अहम है। भारत का मानना है कि समुद्री निगरानी, आतंकवाद से मुकाबले, साइबर सुरक्षा और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए देशों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
भारत की इस पहल को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन और कुछ आसियान देशों के बीच समुद्री क्षेत्रों को लेकर विवाद रहे हैं। ऐसे में भारत का रक्षा सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन मजबूत करने में मदद कर सकता है। हालांकि, भारत ने इस पहल को किसी एक देश के खिलाफ कदम बताने के बजाय क्षेत्रीय सहयोग और स्थिरता पर जोर दिया है।
भारत की यह पहल उसकी ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की रणनीति के अनुरूप है। भारत चाहता है कि आसियान देशों के साथ रक्षा तकनीक, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त प्रशिक्षण और शोध के क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत किया जाए। इससे न केवल भारत और आसियान देशों के संबंध गहरे होंगे, बल्कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों को भी मजबूती मिल सकती है।





