डल झील में अब नहीं चलेंगी पेट्रोल-डीजल वाली नावें, जेट स्की पर भी रोक

जम्मू-कश्मीर की मशहूर डल झील को प्रदूषण से बचाने के लिए जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। अदालत ने डल झील में पेट्रोल-डीजल से चलने वाली मोटरबोट, मोटराइज्ड शिकारा और जेट स्की के संचालन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। यह फैसला झील के पर्यावरण को सुरक्षित रखने और बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से लिया गया है। इस आदेश से झील में चलने वाली करीब 166 मोटरबोटों का संचालन प्रभावित हो सकता है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति राजेश शेखरी की खंडपीठ ने यह आदेश एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने लेक कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (LCMA), पर्यटन विभाग और पुलिस को आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंध के बावजूद यदि कोई ईंधन से चलने वाली नाव या जेट स्की संचालित होती है, तो इसे अदालत के आदेश की अवमानना माना जा सकता है।

अदालत ने कहा कि झीलों को प्रदूषण से बचाना बेहद जरूरी है। पेट्रोल-डीजल से चलने वाली नावों के कारण पानी और आसपास के पर्यावरण पर बुरा असर पड़ सकता है। डल झील कश्मीर की पहचान होने के साथ-साथ पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र भी है। ऐसे में झील की सुंदरता, स्वच्छता और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखना जरूरी है। अदालत ने माना कि पर्यावरण की सुरक्षा और पर्यटन गतिविधियों के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।

इस समस्या के समाधान के लिए अदालत ने सरकार को सौर ऊर्जा और बिजली से चलने वाली नावों की संभावनाएं तलाशने को कहा है। सरकार को विशेषज्ञों से सलाह लेकर मोटरबोट के लिए एक व्यापक नीति तैयार करने और यह जांचने के निर्देश दिए गए हैं कि पेट्रोल-डीजल वाले इंजनों की जगह सौर ऊर्जा या इलेक्ट्रिक इंजन लगाए जा सकते हैं या नहीं। इससे पर्यटन गतिविधियां जारी रखने के साथ प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, अदालत ने आपातकालीन सेवाओं, बचाव अभियान, कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रशासनिक नावों को इस प्रतिबंध से छूट दी है। दूसरी ओर, डल झील में मोटरबोट चलाने वाले कारोबारियों ने लाइसेंस नवीनीकरण और रोजगार से जुड़े मुद्दे भी उठाए हैं। उनका कहना है कि लाइसेंस की प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि इस कारोबार से जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित न हो। अदालत ने सरकार को पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन और कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित नीति बनाने की दिशा में कदम उठाने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।