दिशा सालियान की मौत के मामले में बेटे आदित्य ठाकरे का नाम जांच के दायरे में आने के बाद शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके परिवार को इस मामले में लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उद्धव ठाकरे ने तंज कसते हुए सवाल किया कि अगर इस मामले में उनके परिवार के नाम जोड़े जा रहे हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम क्यों नहीं लिए जा रहे।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनका और उनके बेटे आदित्य का दिशा सालियान की मौत से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच करने वालों को जांच करनी चाहिए, लेकिन उनके परिवार की कथित तौर पर ‘चरित्र हत्या’ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर इस तरह के आरोप लगातार जारी रहे तो उनका परिवार कानूनी कार्रवाई करेगा।
यह विवाद तब तेज हुआ जब CBI ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद दिशा सालियान की मौत के मामले में FIR दर्ज की। रिपोर्टों के मुताबिक, FIR में आदित्य ठाकरे, उद्धव ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती, डीनो मोरिया, सूरज पंचोली समेत कई लोगों की भूमिकाओं की जांच का उल्लेख है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम FIR में होना अपने आप में उसे आरोपी साबित नहीं करता।
आदित्य ठाकरे ने भी इससे पहले सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोपों को खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि वह दिशा सालियान से कभी मिले या उन्हें जानते तक नहीं थे और उनका नाम इस मामले से जोड़ना उनके खिलाफ ‘चरित्र हत्या’ की कोशिश है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट ने जांच का आदेश देते समय यह भी स्पष्ट किया था कि पर्याप्त सामग्री सामने आने तक किसी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाना चाहिए।
दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। शुरुआती तौर पर पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला माना था। उनके पिता सतीश सालियान की याचिका के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया। इसके बाद CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की है।मामले में दिशा सालियान के पिता की शिकायत में कई लोगों की कथित भूमिका की जांच की मांग की गई है। वहीं, जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें से कुछ ने आरोपों से इनकार किया है। फिलहाल CBI की जांच जारी है और FIR में दर्ज आरोपों की सत्यता जांच के दौरान तय की जानी है।





