दिल्ली की साकेत अदालत ने 2019 में एक महिला पर कथित तौर पर तेजाब फेंकने के मामले में चार आरोपियों को बरी कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरविंदर सिंह जग्गी ने प्रीत पाल, उसके पिता रमेश, सुरेश चंद और बाबू कुमार को आरोपों से बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की संलिप्तता को पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं कर सका। फैसला 28 सितंबर 2026 को सुनाया गया।यह मामला 9 जुलाई 2019 का है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, महिला संगम विहार इलाके में शिव मंदिर के पास अपने घर लौट रही थी, तभी दो मोटरसाइकिलों पर आए चार लोगों ने कथित तौर पर उसकी पीठ और कमर पर तेजाब जैसा पदार्थ फेंका। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि हमले का मकसद महिला पर पहले दर्ज एक POCSO मामले को वापस लेने का दबाव बनाना था।
हालांकि, अदालत ने मामले की जांच और अभियोजन की कहानी में कई महत्वपूर्ण कमियां दर्ज कीं। अदालत के मुताबिक, घटना के करीब 18 महीने बाद 7 जनवरी 2021 को FIR दर्ज की गई, जबकि महिला का बयान और मेडिकल जांच कथित घटना वाले दिन ही हो गई थी। जांच अधिकारी इस देरी का स्पष्ट कारण नहीं बता सके। अदालत ने माना कि इतनी लंबी और अस्पष्ट देरी अभियोजन के मामले पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अदालत ने महिला की गवाही पर भी सवाल उठाए। फैसले के अनुसार, महिला ने जिरह के दौरान बताया कि पीठ पर जलन महसूस होने के बाद उसने पीछे मुड़कर देखा था। इस आधार पर अदालत ने कहा कि उसने वास्तव में यह नहीं देखा था कि तरल पदार्थ किसने फेंका। अदालत ने प्रीत पाल द्वारा बोतल पकड़े होने की उसकी बात को बाद में लगाया गया अनुमान माना।
जांच में अन्य संभावित साक्ष्य जुटाने में भी कमी पाई गई। अदालत ने कहा कि मौके पर मौजूद बताए गए राहगीरों से पूछताछ नहीं की गई, आसपास की दुकानों और मंदिर की CCTV फुटेज हासिल नहीं की गई और आरोपियों की कथित गतिविधियों से संबंधित कॉल डिटेल या सेल-टावर लोकेशन का इस्तेमाल भी नहीं किया गया। कथित हमले में इस्तेमाल बोतल, कंटेनर या मोटरसाइकिल भी बरामद नहीं हुई।
मामले में एक और महत्वपूर्ण साक्ष्य उस समय नष्ट हो गया जब महिला के जले हुए कपड़े, जिन पर फोरेंसिक जांच में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की मौजूदगी पाई गई थी, अगस्त 2024 में मलकाना में लगी आग में नष्ट हो गए। अदालत ने कहा कि इससे उस भौतिक साक्ष्य की प्रत्यक्ष जांच की संभावना खत्म हो गई।
अदालत ने यह भी पाया कि प्रीत पाल ने उस पुराने POCSO मामले में मार्च 2025 का बरी होने का फैसला पेश किया था। अदालत के अनुसार, रिकॉर्ड में दोनों पक्षों के बीच पहले से व्यक्तिगत विवाद और दुश्मनी से जुड़े दस्तावेज भी मौजूद थे। हालांकि महिला के कपड़ों पर रासायनिक पदार्थ की मौजूदगी और उसके घायल होने की बात सामने आई, लेकिन अदालत ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि हमला किस आरोपी ने किया था या चारों ने मिलकर अपराध करने की साझा मंशा से काम किया था।
फैसले के बाद चारों आरोपी संबंधित आरोपों से बरी हो गए। अदालत की टिप्पणी मुख्य रूप से अभियोजन द्वारा आरोपियों की पहचान और उनकी कथित भूमिका को पर्याप्त साक्ष्यों से साबित न कर पाने पर आधारित रही।





