जेलेंस्की बोले- ट्रंप की बात नहीं मानेंगे, रूस की तेल रिफाइनरियों पर फिर होंगे हमले

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस मांग को मानने से इनकार कर दिया है, जिसमें यूक्रेन से रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने को कहा गया था। जेलेंस्की ने साफ किया है कि यूक्रेन अब रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए तैयार नहीं है। इस फैसले से अमेरिका और यूक्रेन के बीच तनाव और बढ़ गया है।

दरअसल, ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए संघर्षविराम का प्रस्ताव दिया था। यूक्रेन ने कुछ समय तक रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोककर इस पहल को मौका दिया, लेकिन रूस की ओर से यूक्रेन के बिजलीघरों और ऊर्जा ढांचे पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे। इसके बाद जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन अब इस व्यवस्था का पालन नहीं करेगा। 15 अक्टूबर को यूक्रेन ने रूस के रियाजान क्षेत्र में तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया। इसके बाद रूस की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले दोबारा शुरू होने की खबरें सामने आईं।

जेलेंस्की ने अमेरिका और रूस के बीच डीजल की आपूर्ति को लेकर हुए समझौते पर भी नाराजगी जताई है। ट्रंप प्रशासन ने रूस पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत देकर रूसी डीजल को अमेरिकी और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का रास्ता बनाया है। जेलेंस्की ने इसे गलत और कमजोर फैसला बताया। उनका कहना है कि रूस को तेल और ईंधन बेचने की अनुमति देने से उसकी कमाई बढ़ेगी, जिसका इस्तेमाल वह यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने में कर सकता है। उनके मुताबिक, रूस पर दबाव कम करने से शांति स्थापित करने की कोशिशों को नुकसान पहुंचेगा।

वहीं, ट्रंप ने रूस की तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों की आलोचना की है। उनका कहना है कि इन हमलों से डीजल की आपूर्ति प्रभावित होती है और दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने के बजाय युद्ध खत्म करने के लिए दूसरे रास्ते तलाशने चाहिए। दूसरी ओर, जेलेंस्की का तर्क है कि अगर रूस यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले बंद नहीं करता, तो यूक्रेन भी अपने हमले रोकने के लिए बाध्य नहीं है।

इस पूरे विवाद के बीच अमेरिका और यूक्रेन के संबंधों में खटास बढ़ती दिखाई दे रही है। जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन को अपने सहयोगियों से ईमानदारी और स्पष्ट समर्थन की जरूरत है। उनका मानना है कि रूस को आर्थिक राहत देने के बजाय उस पर युद्ध रोकने के लिए दबाव बनाया जाना चाहिए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ट्रंप और जेलेंस्की के बीच बढ़ता तनाव रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों पर क्या असर डालता है।