दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की मौजूदगी को लेकर नई बहस छिड़ गई है। प्रदर्शन स्थल से सामने आई तस्वीरों और वीडियो के बाद कुछ लोगों ने दावा किया कि “जितने प्रदर्शनकारी हैं, उतने ही इन्फ्लुएंसर भी मौजूद हैं।” इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर पक्ष और विपक्ष में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
कई कंटेंट क्रिएटर्स और डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर लाइव स्ट्रीम, वीडियो और इंटरव्यू करते नजर आए। समर्थकों का कहना है कि इससे छात्रों की आवाज़ देशभर तक पहुंच रही है, जबकि आलोचकों का आरोप है कि कुछ लोग आंदोलन को कंटेंट बनाने का माध्यम बना रहे हैं।
प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना है कि सोशल मीडिया की वजह से उनकी मांगों को व्यापक पहचान मिली है। उनका मानना है कि यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार कवरेज नहीं मिलती, तो उनकी समस्याएं इतनी तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय नहीं बन पातीं।
वहीं राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय है। कुछ नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक आंदोलन की ताकत बताया, जबकि अन्य ने कहा कि गंभीर मुद्दों पर केवल सोशल मीडिया की लोकप्रियता नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
फिलहाल जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और सोशल मीडिया की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में बनी हुई है। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि डिजिटल युग में इन्फ्लुएंसर्स की मौजूदगी जन आंदोलनों को मजबूत करती है या फिर उनका ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटका देती है।





