जम्मू-कश्मीर में मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने संकेत दिया है कि अगले दो से तीन दिनों में कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने मंत्री पद की दौड़ में शामिल विधायकों को लॉबिंग बंद करने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मंत्रियों के नाम तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और अब किसी तरह की सिफारिश करने से कोई फायदा नहीं होगा।
उमर अब्दुल्ला ने 24 अक्टूबर को श्रीनगर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की। इस दौरान मंत्रिमंडल विस्तार और नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने अगले सप्ताह के शुरुआती दिनों में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने के लिए समय मांगा है। हालांकि, समारोह की अंतिम तारीख उपराज्यपाल की ओर से तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नए मंत्रियों के नामों को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से चर्चा की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि कई विधायक मंत्री पद पाने के लिए फोन और व्हाट्सऐप संदेशों के जरिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। कुछ विधायक अपने राजनीतिक अनुभव और कामकाज का हवाला देकर भी पद पाने की कोशिश कर रहे हैं। उमर अब्दुल्ला ने ऐसे विधायकों को संदेश दिया कि वे इस तरह की कोशिशें बंद करें, क्योंकि मंत्रिमंडल को लेकर फैसला किया जा चुका है।
जम्मू-कश्मीर में फिलहाल मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद में छह सदस्य हैं। नियमों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम नौ मंत्री हो सकते हैं। इस लिहाज से मंत्रिमंडल में तीन पद खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए पार्टी के भीतर कई नेताओं की दावेदारी चर्चा में है। ऐसे में मुख्यमंत्री के सामने क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, राजनीतिक अनुभव और संगठन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
अब सभी की नजर मंत्रिमंडल विस्तार की आधिकारिक तारीख और नए मंत्रियों के नामों पर है। अगले दो से तीन दिनों में होने वाला संभावित विस्तार जम्मू-कश्मीर सरकार के कामकाज और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि, नए मंत्रियों के नामों की औपचारिक घोषणा होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।





