जम्मू-कश्मीर को एक बार फिर पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने की उम्मीद तेज हो गई है। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले के बयान के बाद इस मुद्दे पर चर्चा बढ़ गई है। उन्होंने श्रीनगर में कहा कि केंद्र सरकार आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने पर फैसला कर सकती है। हालांकि, उन्होंने इसकी कोई निश्चित तारीख नहीं बताई।
रामदास आठवले ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के वादे से परिचित हैं। उन्होंने अगस्त 2019 का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय अनुच्छेद 370 हटाने के साथ जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन किया गया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, जबकि लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया।
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग लंबे समय से उठ रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार भी इस मांग को जल्द पूरा करने की बात कहती रही है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा भी पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठा चुकी है। ऐसे में रामदास आठवले का बयान इस मुद्दे को लेकर नई उम्मीदें पैदा कर रहा है।
आठवले ने जम्मू-कश्मीर के विकास पर जोर देते हुए कहा कि केंद्र सरकार क्षेत्र में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में राज्य के दर्जे को लेकर सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने से जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं।
हालांकि, अभी तक केंद्र सरकार की ओर से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। ऐसे में रामदास आठवले के बयान को एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का फैसला कब लिया जाता है।





