IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़े मामलों में न्यायाधीशों के सुनवाई से अलग होने का मामला लगातार चर्चा में है। हाल ही में दिल्ली की केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) पीठ के न्यायमूर्ति राजवीर सिंह वर्मा के मामले से हटने के बाद ऐसे न्यायिक सदस्यों की संख्या 17 तक पहुंच गई है। हालांकि, सभी मामलों में जजों के अलग होने की वजह एक जैसी नहीं रही है और कई मामलों में इसका स्पष्ट कारण भी सामने नहीं आया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह सिलसिला करीब 2013 से जारी है। अब तक सुप्रीम कोर्ट के 2 न्यायाधीश, नैनीताल हाई कोर्ट के 4 न्यायाधीश, CAT के 9 न्यायिक सदस्य और जिला न्यायपालिका के 2 न्यायाधीश संजीव चतुर्वेदी से जुड़े अलग-अलग मामलों की सुनवाई से हट चुके हैं। कुछ मामलों में न्यायाधीशों ने कोई कारण सार्वजनिक नहीं किया, जबकि कुछ मामलों में निजी या पूर्व संबंधों को अलग होने की वजह बताया गया।
संजीव चतुर्वेदी 2002 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी हैं। वह AIIMS में मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) के पद पर भी रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों में जांच और कार्रवाई कराई थी। उनके काम के लिए उन्हें 2015 में प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार भी मिला था।
मौजूदा मामला उत्तराखंड में IFS अधिकारियों की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट यानी ACR से जुड़ी व्यवस्था को लेकर है। चतुर्वेदी ने नवंबर 2021 में जारी उत्तराखंड सरकार के आदेश को चुनौती दी है। इसी मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक सदस्यों के अलग होने की घटनाओं ने सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, केवल किसी न्यायाधीश के मामले से अलग होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उन्होंने किसी पक्ष का समर्थन या विरोध किया है। 17 न्यायिक सदस्यों के अलग होने के पीछे अलग-अलग परिस्थितियां रही हैं और सभी मामलों में एक समान कारण दर्ज नहीं है। इसलिए इस पूरे मामले को समझने के लिए संबंधित न्यायिक आदेशों और प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को अलग-अलग देखना जरूरी है।





