क्या इजरायल फिर ईरान पर हमला करेगा? ट्रंप प्रशासन की 40 हजार भारी बमों की डील से बढ़ी अटकलें

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इजरायल को करीब 2.8 अरब डॉलर के हथियार पैकेज की तैयारी कर रहा है। इसमें 40,000 ऐसे बम शामिल बताए जा रहे हैं जिनमें प्रत्येक का वजन करीब 2,000 पाउंड यानी लगभग 900 किलोग्राम है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित पैकेज में 20,000 MK-84 और 20,000 BLU-117 बम शामिल होंगे। यह डील अभी अंतिम रूप से पूरी नहीं हुई है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने संबंधित कांग्रेस समितियों को इसकी अनौपचारिक जानकारी दे दी है।

इन हथियारों की खबर ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ संघर्ष पहले से गंभीर है। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके बाद ईरान ने इजरायल और उन खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए थे। इसके बाद से क्षेत्र में सैन्य तनाव बना हुआ है। सितंबर की शुरुआत में ट्रंप ने ईरान के पिकैक्स माउंटेन क्षेत्र में गतिविधियों को लेकर चेतावनी भी दी थी और कहा था कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका वहां हमला कर सकता है।

ऐसे में 40 हजार भारी बमों की प्रस्तावित बिक्री को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन हथियारों का इस्तेमाल भविष्य में ईरान के खिलाफ किया जा सकता है। हालांकि, मौजूदा जानकारी के आधार पर यह कहना संभव नहीं है कि इस हथियार पैकेज का उद्देश्य ईरान पर किसी नए हमले की तैयारी है। Reuters के अनुसार, प्रस्तावित बिक्री ऐसे समय में सामने आई है जब गाजा में जारी संघर्ष के बीच इजरायल की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की अमेरिकी नीति जारी है।

2,000 पाउंड के MK-84 और BLU-117 जैसे बम बेहद भारी हवाई हथियार हैं। इनका इस्तेमाल बड़े या मजबूत ठिकानों और संरचनाओं को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। इसी वजह से इन हथियारों की डिलीवरी पहले भी विवाद का विषय रही है। बाइडन प्रशासन ने 2024 में MK-84 जैसे भारी बमों की एक खेप की डिलीवरी को गाजा में बड़े पैमाने पर नागरिक नुकसान की आशंका के चलते रोक दिया था। अब ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित डील उस नीति में बड़ा बदलाव दिखाती है।इजरायल और ईरान के बीच आगे सैन्य कार्रवाई की संभावना को लेकर पहले भी दोनों देशों और अमेरिका के बीच अलग-अलग विकल्पों पर चर्चा होती रही है।

जुलाई में एक इजरायली अधिकारी ने Reuters को बताया था कि ट्रंप और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए कूटनीति, आर्थिक दबाव और सैन्य हमले सहित कई विकल्पों पर चर्चा हुई थी। हालांकि उस समय भी नेतन्याहू ने यह नहीं कहा था कि इजरायल तत्काल ईरान पर दोबारा हमला करना चाहता है।इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी घरेलू राजनीति भी एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन गई है।

नवंबर में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने हैं और ईरान युद्ध से जुड़ी तेल की कीमतें, अमेरिकी सैन्य खर्च और विदेश नीति घरेलू राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुके हैं। Reuters के अनुसार, ट्रंप ने हाल में संकेत दिया था कि वह ईरान के साथ संघर्ष को चुनावों के बाद समाप्त होते देखना चाहते हैं। इसलिए हथियारों की यह प्रस्तावित डील अपने आप में इजरायल द्वारा ईरान पर नए हमले का प्रमाण नहीं है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में न तो इजरायल ने ईरान पर किसी नए हमले की तारीख घोषित की है और न ही अमेरिकी प्रशासन ने यह कहा है कि प्रस्तावित 40 हजार बम विशेष रूप से ईरान के खिलाफ इस्तेमाल किए जाएंगे। इसलिए आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास, क्षेत्रीय सैन्य घटनाक्रम और इजरायल की सुरक्षा नीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।