उत्तर प्रदेश पुलिस में डीएसपी और संभल के सीओ कुलदीप कुमार उर्फ कुलदीप अहलावत को उनकी उत्कृष्ट पुलिस सेवा के लिए राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया गया है। लखनऊ के लोक भवन में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। कुलदीप कुमार मूल रूप से मेरठ जिले के बहसूमा क्षेत्र के रहने वाले हैं।
कुलदीप कुमार का सफर खेल के मैदान से पुलिस सेवा तक पहुंचा है। वह राष्ट्रीय स्तर के एथलीट रहे हैं और 2000 से 2006 तक 1500 और 5000 मीटर दौड़ में लगातार राष्ट्रीय चैंपियन रहे। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इनमें 2002 के बुसान एशियाई खेल, श्रीलंका की एशिया चैंपियनशिप, 2003 की वर्ल्ड क्रॉस कंट्री और फिलीपींस की एशिया चैंपियनशिप शामिल हैं।
खेल के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में अपनी सेवा शुरू की। यूपी पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, कुलदीप कुमार की भर्ती 2001 में हुई थी और बाद में उन्हें पदोन्नति देकर डिप्टी एसपी बनाया गया। वह नवंबर 2024 से संभल में डीएसपी के पद पर तैनात हैं।
उन्हें वीरता पदक 2019 में बरेली में हुई 15 लाख रुपये से अधिक की लूट के मामले में बदमाशों के साथ हुई मुठभेड़ और साहसिक पुलिस कार्रवाई के लिए दिया गया है। इस सम्मान की घोषणा 26 जनवरी 2025 को की गई थी, जबकि पदक समारोह में उन्हें अब सम्मानित किया गया।
कुलदीप कुमार का नाम संभल में कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में भी सामने आया है। संभल हिंसा की जांच के लिए गठित एसआईटी में भी उन्होंने भूमिका निभाई। पुलिस सेवा के साथ उनका खेलों से जुड़ा अनुभव भी उनकी पहचान का अहम हिस्सा रहा है। वर्ष 2021 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिष्ठित लक्ष्मण पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
मेरठ से निकलकर खेल के मैदान में देश का प्रतिनिधित्व करने और फिर पुलिस सेवा में अपनी जिम्मेदारी निभाने तक कुलदीप कुमार का सफर काफी अलग रहा है। राष्ट्रपति वीरता पदक मिलने के बाद एक बार फिर उनका नाम मेरठ और उत्तर प्रदेश दोनों में चर्चा में है।





