जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला के वैवाहिक विवाद का अंत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता (मेडिएशन) के जरिए समझौता होने के बाद उनके तलाक को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही करीब 17 वर्षों से अलग रह रहे इस दंपति का वैवाहिक संबंध कानूनी रूप से समाप्त हो गया।
इस मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से अपने विवाद का समाधान कर चुके हैं और अब विवाह को समाप्त करने पर सहमत हैं। उन्होंने अदालत से तलाक की डिक्री जारी करने का अनुरोध किया। इसके बाद अदालत ने समझौते को स्वीकार करते हुए तलाक को मंजूरी दे दी।
उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का विवाह वर्ष 1994 में हुआ था। बाद के वर्षों में दोनों के रिश्तों में मतभेद बढ़े और वे अलग रहने लगे। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की तलाक याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत ने मामले को पहले मध्यस्थता के लिए भेजा था ताकि आपसी सहमति से समाधान निकल सके।
मध्यस्थता प्रक्रिया सफल रहने के बाद दोनों पक्षों ने अपने वैवाहिक विवाद को समाप्त करने का निर्णय लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस समझौते को रिकॉर्ड पर लेते हुए विवाह विच्छेद की अनुमति प्रदान कर दी। अदालत के इस फैसले के साथ वर्षों से चल रहा कानूनी विवाद समाप्त हो गया।
इस फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, यह मामला पूरी तरह व्यक्तिगत और पारिवारिक विवाद से जुड़ा था, इसलिए अदालत ने भी इसे आपसी सहमति से सुलझाने को प्राथमिकता दी।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने यह भी स्पष्ट किया कि लंबे समय से अलग रह रहे दंपति, यदि आपसी सहमति से विवाह समाप्त करना चाहते हैं, तो मध्यस्थता के माध्यम से समाधान निकालना न्यायिक प्रक्रिया का एक प्रभावी तरीका हो सकता है। अब उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला कानूनी रूप से अलग हो चुके हैं और अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए स्वतंत्र हैं।





