अल्बर्टा ने चुना कनाडा के साथ रहना, अलग देश बनाने का प्रस्ताव खारिज; कार्नी को बड़ी जीत

कनाडा के तेल-समृद्ध प्रांत अल्बर्टा में अलग देश बनाने की मांग को बड़ा झटका लगा है। यहां अलग होने की प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव को मतदाताओं ने खारिज कर दिया है। इस फैसले को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के लिए बड़ी राजनीतिक जीत माना जा रहा है। मतदान के नतीजों से संकेत मिला है कि प्रांत के ज्यादातर लोग फिलहाल कनाडा के साथ बने रहना चाहते हैं।

अल्बर्टा कनाडा के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। यहां तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार हैं। लंबे समय से प्रांत के कुछ लोग केंद्र सरकार की नीतियों से नाराज हैं। उनका आरोप है कि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े फैसलों में अल्बर्टा के हितों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। इसी असंतोष के चलते अलग देश बनाने की मांग ने जोर पकड़ा।

इस मुद्दे पर हुए मतदान में लोगों के सामने अलग होने की दिशा में आगे बढ़ने की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया था। यह सीधे तौर पर कनाडा से अलग होने का अंतिम फैसला नहीं था, बल्कि अलगाव की मांग पर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने से जुड़ा कदम था। प्रस्ताव खारिज होने के बाद अलग देश बनाने के समर्थकों को झटका लगा है।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के लिए यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कनाडा की एकता को बनाए रखने के पक्ष में समर्थन दिखाई देता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और कनाडा के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर चल रही चुनौतियों के बीच यह घटनाक्रम कार्नी की सरकार के लिए राहत देने वाला माना जा रहा है।

हालांकि, प्रस्ताव खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि अल्बर्टा में अलगाव की मांग पूरी तरह समाप्त हो गई है। प्रांत में केंद्र सरकार की नीतियों और स्थानीय अधिकारों को लेकर असंतोष अभी भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रह सकता है। फिलहाल, इस फैसले से कनाडा के साथ बने रहने के समर्थकों को मजबूती मिली है और