अमेरिका ने भारत पर लगाया ‘फोर्स्ड लेबर टैरिफ’, कई निर्यात उत्पादों पर बढ़ा दबाव

अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर ‘फोर्स्ड लेबर टैरिफ’ (Forced Labour Tariff) लागू करने का फैसला किया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जिन उत्पादों के निर्माण में कथित तौर पर जबरन श्रम (Forced Labour) के इस्तेमाल की आशंका होगी, उन पर अतिरिक्त जांच और शुल्क लगाया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना बताया गया है।


अमेरिका का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में जबरन श्रम से बने उत्पादों को रोकने के लिए यह नीति अपनाई गई है। इसके तहत जिन कंपनियों या उत्पादों पर संदेह होगा, उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज़ और प्रमाण देने होंगे। यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो उन उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है या उनका आयात रोका भी जा सकता है।


इस फैसले का असर भारत के कुछ निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है। विशेष रूप से वस्त्र (टेक्सटाइल), परिधान, चमड़ा, कृषि उत्पाद और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को अधिक जांच का सामना करना पड़ सकता है। उद्योग जगत का मानना है कि इससे निर्यात लागत बढ़ सकती है और भारतीय कंपनियों को नए अनुपालन मानकों का पालन करना होगा।


भारत सरकार ने इस तरह के व्यापारिक कदमों पर पहले भी कहा है कि भारतीय उद्योग अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का पालन करते हैं और किसी भी व्यापारिक विवाद का समाधान बातचीत तथा विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत किया जाना चाहिए। सरकार की ओर से इस नए फैसले का विस्तृत अध्ययन किए जाने की संभावना है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति व्यापक स्तर पर लागू होती है, तो भारतीय निर्यातकों को अपनी सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ानी होगी और श्रम मानकों से जुड़े प्रमाण मजबूत करने होंगे। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताओं में यह मुद्दा प्रमुख रूप से उठ सकता है।