अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। इस कार्रवाई के बाद विपक्षी नेताओं ने दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए और दोनों की रिहाई की मांग की। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी। नेताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर चिंता जताई।
यह पूरा मामला दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से जुड़ा है। अभिजीत दीपके ने अपने साथियों आशुतोष रांका और सौरभ दास की गिरफ्तारी के विरोध में इस प्रदर्शन का आह्वान किया था। इससे पहले दोनों को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई। दीपके ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अपने साथियों के समर्थन में प्रदर्शन करने का फैसला किया था।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया। इसके बाद नेहा बोरा भी प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचीं, जहां उन्हें भी हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई के बाद समर्थकों और संबंधित संगठनों ने पुलिस के रवैये पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि प्रदर्शनकारियों के साथ उचित व्यवहार किया जाना चाहिए और उन्हें अपने वकीलों से संपर्क करने की सुविधा मिलनी चाहिए।
इस मामले पर विपक्षी नेताओं ने भी आवाज उठाई। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन ने हिरासत की कार्रवाई पर चिंता जताते हुए रिहाई की मांग का समर्थन किया। वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने तिरंगा फहराने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने के अधिकार को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा। विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार मिलना चाहिए।
17 अक्टूबर को इस मामले में आगे की कार्रवाई की जानकारी सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, नेहा बोरा को हिरासत से रिहा कर दिया गया, जबकि अभिजीत दीपके के मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी रही। इस घटना के बाद तिरंगा प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई और विरोध करने के अधिकार को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।





