UNSC में भारत की दावेदारी का पाकिस्तान, तुर्की और इटली क्यों कर रहे विरोध? वीटो पावर के भी खिलाफ कॉफी क्लब

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में स्थायी सदस्यता को लेकर भारत की दावेदारी लंबे समय से चर्चा में है। भारत सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के साथ उचित प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है। लेकिन उसकी इस दावेदारी का पाकिस्तान, तुर्की और इटली समेत कई देश विरोध कर रहे हैं। ये देश ‘Uniting for Consensus’ (UfC) नाम के समूह का हिस्सा हैं, जिसे आम तौर पर ‘कॉफी क्लब’ कहा जाता है।

कॉफी क्लब का मुख्य विरोध नए स्थायी सदस्यों को शामिल किए जाने को लेकर है। इस समूह का कहना है कि UNSC में नए स्थायी सदस्य बनाने के बजाय निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। इसके तहत देशों को लंबे कार्यकाल के लिए चुने जाने की व्यवस्था का समर्थन किया जाता है, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल सके।

भारत की दावेदारी के संदर्भ में पाकिस्तान का रुख खास तौर पर महत्वपूर्ण है। भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से राजनीतिक और क्षेत्रीय मतभेद रहे हैं। वहीं, तुर्की और इटली भी कॉफी क्लब के उस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं, जिसमें नए स्थायी सदस्यों के बजाय निर्वाचित सीटों के विस्तार की बात कही जाती है। इस समूह में G4 देशों के कुछ क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी भी शामिल हैं। G4 में भारत के अलावा जापान, जर्मनी और ब्राजील शामिल हैं।

वीटो पावर को लेकर भी कॉफी क्लब का रुख भारत की मांग से अलग है। मौजूदा UNSC में पांच स्थायी सदस्यों—अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन—के पास वीटो पावर है। कॉफी क्लब नए स्थायी सदस्यों को वीटो देने के बजाय मौजूदा वीटो व्यवस्था को सीमित करने या भविष्य में खत्म करने की वकालत करता है। समूह का तर्क है कि वीटो व्यवस्था में सुधार किए बिना सिर्फ स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाना सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक नहीं बनाएगा।

भारत का कहना है कि मौजूदा UNSC ढांचा आज की वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय की तुलना में आज दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक तस्वीर काफी बदल चुकी है। भारत खुद को दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और वैश्विक मंच पर सक्रिय देशों में गिनाता है और इसी आधार पर सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है।

इस पूरे विवाद का केंद्र UNSC में सुधार का तरीका है। एक तरफ भारत और G4 देश स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, वहीं कॉफी क्लब नए स्थायी सदस्यों के बजाय निर्वाचित सीटों को बढ़ाने के पक्ष में है। इसके साथ ही वीटो पावर का भविष्य भी इस बहस का अहम हिस्सा बना हुआ है। इसलिए UNSC में सुधार को लेकर भारत की दावेदारी के रास्ते में सिर्फ किसी एक देश का विरोध नहीं, बल्कि सुरक्षा परिषद के भविष्य के ढांचे को लेकर देशों के बीच व्यापक मतभेद भी बड़ी चुनौती हैं।