निगम चुनाव से पहले भाजपा में गुटबाजी रोकने की तैयारी, अमित शाह ले सकते हैं नेताओं की रिपोर्ट

निगम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठन को मजबूत करने और पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी को खत्म करने की कवायद तेज कर दी है। केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि चुनाव से पहले सभी नेता और कार्यकर्ता आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होकर काम करें। इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ केंद्रीय नेता सक्रिय हो गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह भी संगठन की स्थिति पर नजर रख रहे हैं और नेताओं से अलग-अलग फीडबैक लेकर उनकी कार्यशैली का आकलन कर सकते हैं।

पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच आपसी खींचतान और कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने की है। कई जगहों पर संगठन के भीतर तालमेल की कमी और आपसी मतभेद चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि चुनाव से पहले इन समस्याओं को दूर किया जाए, ताकि पार्टी को इसका नुकसान न उठाना पड़े।

अमित शाह वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और संगठन से जुड़े लोगों से अलग-अलग बातचीत कर सकते हैं। इस दौरान उनसे जिलों में पार्टी की स्थिति, कार्यकर्ताओं की सक्रियता, स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल और चुनावी तैयारियों की जानकारी ली जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, शाह एक-एक नेता की रिपोर्ट लेकर यह समझने की कोशिश कर सकते हैं कि कौन पार्टी को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और कहां सुधार की जरूरत है।

भाजपा की रणनीति केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना भी इसका अहम हिस्सा है। पार्टी चाहती है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाए और उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए। इसके साथ ही टिकट के दावेदारों के बीच होने वाली खींचतान को भी समय रहते नियंत्रित किया जाए, ताकि चुनाव के दौरान बगावत या भीतरघात की स्थिति न बने।

केंद्रीय नेतृत्व का मानना है कि निगम चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए संगठन की एकजुटता बेहद जरूरी है। इसी वजह से पार्टी के बड़े नेता चुनावी तैयारियों पर लगातार नजर रख रहे हैं। अब देखना होगा कि अमित शाह की समीक्षा और केंद्रीय नेतृत्व की इस पहल से भाजपा के अंदर गुटबाजी कितनी कम होती है और पार्टी निगम चुनाव में कितनी मजबूत स्थिति बना पाती है।