नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर सक्रिय अभिजीत दीपके ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यदि प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक अपना अनशन समाप्त करते हैं या वहां से हटते हैं, तो वह स्वयं उनकी जगह अनशन पर बैठेंगे। दीपके के इस बयान के बाद पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर चल रहे आंदोलन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय लोगों के अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी, संस्कृति और स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है। उनके आंदोलन को देश के कई सामाजिक संगठनों, छात्रों और पर्यावरण प्रेमियों का समर्थन भी मिला है।इसी बीच अभिजीत दीपके ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के भविष्य और हिमालय की सुरक्षा का सवाल है। उन्होंने कहा, “अगर सोनम वांगचुक किसी कारणवश वहां से जाते हैं, तो मैं उनकी जगह अनशन पर बैठूंगा।
आंदोलन किसी भी हाल में रुकना नहीं चाहिए।”दीपके ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल लद्दाख तक सीमित मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से इस अभियान का समर्थन करें।उधर, सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही है, जबकि सरकार की ओर से अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लद्दाख का पारिस्थितिक संतुलन जलवायु परिवर्तन और तेजी से हो रहे विकास कार्यों के कारण प्रभावित हो रहा है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है।अभिजीत दीपके के इस ऐलान से यह स्पष्ट होता है कि आंदोलन को जारी रखने के लिए कई सामाजिक कार्यकर्ता आगे आने को तैयार हैं।
हालांकि, आगे की रणनीति क्या होगी और सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाएगी, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।फिलहाल, सोनम वांगचुक का आंदोलन और अभिजीत दीपके का बयान दोनों ही देशभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। आने वाले दिनों में इस आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह मामला किस ओर बढ़ता है।




