आजम खान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, रामपुर जेल से रिहाई के तुरंत बाद ED ने किया था गिरफ्तार

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत ने रविवार, 1 नवंबर को उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच गाजियाबाद की डासना जेल भेज दिया गया। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है।

दरअसल, आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद शनिवार, 31 अक्टूबर को आजम खान करीब 11 महीने बाद रामपुर जेल से बाहर आए। हालांकि, उनकी रिहाई ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। जेल से बाहर निकलते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया। वहीं, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम रिहा होकर घर पहुंच गए।

गिरफ्तारी के बाद ED की टीम आजम खान को गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश करने पहुंची। सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने उनसे पूछताछ के लिए 14 दिन की कस्टडी मांगी। ED का कहना है कि जौहर विश्वविद्यालय और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताएं हुई हैं। एजेंसी विश्वविद्यालय की फंडिंग, निर्माण और पैसों के स्रोत की जांच कर रही है। हालांकि, अदालत ने उन्हें ED की कस्टडी देने के बजाय 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

अदालत में पेशी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कोर्ट परिसर के आसपास पुलिस बल तैनात रहा और समर्थकों की भीड़ भी जुटी। इस दौरान जब मीडिया ने आजम खान से पूछा कि क्या वह कुछ कहना चाहेंगे, तो उन्होंने जवाब दिया, “अब क्या रह गया है बोलने को।

“गौरतलब है कि आजम खान मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना में उनकी अहम भूमिका रही है। ED इसी ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। फिलहाल, अदालत के आदेश के बाद आजम खान को 14 दिनों के लिए डासना जेल भेज दिया गया है। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच पर सभी की नजर बनी हुई है।