केशव प्रसाद मौर्य का अखिलेश यादव पर हमला, बोले- 2027 में सपा की साइकिल पंचर कर सैफई भेजेगी जनता

लखनऊ, 31 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी बीच उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता 2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी की साइकिल पंचर करके उसे सैफई भेज देगी। मौर्य ने यह भी दावा किया कि अगले 30 साल तक सपा की सत्ता में वापसी नहीं होगी।

केशव प्रसाद मौर्य ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश यादव के सवालों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को मौजूदा सरकार पर सवाल उठाने से पहले 2012 से 2017 के बीच सपा शासनकाल के दौरान हुई घटनाओं की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने उस समय की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए गुंडागर्दी, अपराध, माफियागिरी और दंगों का जिक्र किया। मौर्य ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का हवाला देते हुए कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार उत्तर प्रदेश में अंगद के पांव की तरह मजबूती से टिकी हुई है।

डिप्टी सीएम ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि दोनों नेता सत्ता में वापसी का सपना देख रहे हैं, लेकिन न तो राहुल गांधी देश की सत्ता में आएंगे और न ही अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में सरकार बना पाएंगे। मौर्य ने समाजवादी पार्टी को रामद्रोहियों की पार्टी बताते हुए उसके सनातन प्रेम को ढोंग करार दिया। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जनता सपा को उसकी राजनीतिक हैसियत दिखा देगी।

अखिलेश यादव के चुनाव आयोग से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि नागरिकता का प्रमाणपत्र गृह मंत्रालय जारी करता है, चुनाव आयोग नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को इस विषय की सही जानकारी नहीं है। मौर्य ने एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि सपा प्रमुख इस प्रक्रिया को लेकर इसलिए परेशान हैं, क्योंकि अब मतदाता सूची में गड़बड़ी करना संभव नहीं होगा।

केशव प्रसाद मौर्य ने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची से घुसपैठियों के नाम हटाए जा रहे हैं, इसलिए विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। उनके इन बयानों से उत्तर प्रदेश में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, मौर्य की ओर से लगाए गए ये आरोप और चुनावी दावे उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं।