अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष रुकवाने में अहम भूमिका निभाई थी। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने दोनों देशों को चेतावनी दी थी कि अगर लड़ाई नहीं रोकी गई, तो अमेरिका उन पर 250 प्रतिशत तक टैरिफ लगा देगा और उनके साथ व्यापार बंद कर सकता है।
ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को साफ संदेश दिया था कि युद्ध जारी रहने पर उन्हें अमेरिका के साथ कारोबार करने का मौका नहीं मिलेगा। उनके अनुसार, भारी आर्थिक नुकसान की चेतावनी के बाद दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया। ट्रंप इससे पहले भी कई बार भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का श्रेय ले चुके हैं।
अपने बयान में ट्रंप ने संघर्ष के दौरान विमानों को गिराए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने 11 विमानों के गिराए जाने का दावा किया, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि ये विमान किस देश के थे। उन्होंने यह भी कहा कि कई संघर्षों को रुकवाने में उनकी भूमिका रही है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला।
भारत ने मध्यस्थता के दावे को नकाराभारत ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किसी तीसरे देश की मध्यस्थता के कारण नहीं हुआ था। भारत के अनुसार, 10 मई 2025 को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे बातचीत हुई थी और इसी प्रक्रिया के तहत सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी थी।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया था और 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।
ट्रंप के ताजा बयान ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संघर्ष में अमेरिकी भूमिका और टैरिफ के इस्तेमाल को लेकर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, संघर्ष रुकने के कारणों को लेकर भारत और ट्रंप के दावों में स्पष्ट अंतर है। भारत का आधिकारिक रुख है कि सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क से बनी थी।





