मेटा पर 25 अरब डॉलर का जुर्माना, यूजर्स के निजी डेटा को लेकर अदालत का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा को अमेरिका में बड़ा झटका लगा है। न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने यूजर्स की निजता और निजी जानकारी की सुरक्षा से जुड़े मामले में कंपनी पर 25 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 2.2 लाख करोड़ रुपये होती है। यह मामला सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और यूजर्स के डेटा की सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह मामला मेटा पर यूजर्स की निजी जानकारी के इस्तेमाल और उसकी सुरक्षा को लेकर लगे आरोपों से जुड़ा है। न्यू मैक्सिको के अधिकारियों ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि कंपनी ने यूजर्स को उनकी निजी जानकारी की सुरक्षा और उसके इस्तेमाल के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी। सितंबर 2026 में जूरी ने माना कि कंपनी के कई दावे भ्रामक थे और उसने राज्य के उपभोक्ता संरक्षण कानून का लाखों बार उल्लंघन किया।

मामले की चर्चा कैंब्रिज एनालिटिका विवाद के कारण भी बढ़ी थी। वर्ष 2018 में सामने आए इस विवाद में आरोप लगा था कि कैंब्रिज एनालिटिका नाम की कंपनी ने एक थर्ड-पार्टी ऐप के जरिए करीब 8.7 करोड़ फेसबुक यूजर्स की जानकारी हासिल की थी। इस डेटा का इस्तेमाल लोगों की राजनीतिक पसंद को समझने और 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान लक्षित विज्ञापन तैयार करने के लिए किया गया था। इस घटना के बाद दुनिया भर में सोशल मीडिया पर निजी जानकारी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

अदालत ने मामले में मेटा की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए और कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया। हालांकि, जुर्माने की राशि शुरुआती गणना से कम रखी गई। इस फैसले को बड़ी तकनीकी कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि यूजर्स की निजी जानकारी के इस्तेमाल में पारदर्शिता और सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

वहीं, मेटा ने अदालत के फैसले से असहमति जताई है और इसके खिलाफ अपील करने की बात कही है। अपील की प्रक्रिया के दौरान फैसले और जुर्माने की राशि में बदलाव संभव है। इस मामले का अंतिम परिणाम सोशल मीडिया कंपनियों की डेटा सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों और यूजर्स के अधिकारों के लिहाज से अहम हो सकता है।