ईरान ने अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत पर अपना रुख साफ कर दिया है। ईरान के वरिष्ठ अधिकारी मोहसेन रेजाई ने कहा है कि देश का एक ग्राम संवर्धित यूरेनियम भी बाहर नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका भरोसा कायम करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। ईरान के इस बयान से दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ने की आशंका है।
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद चल रहा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन पर सख्त सीमाएं लगाए और परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे न बढ़े। वहीं, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को देश का अधिकार बताता है और अमेरिका से प्रतिबंधों में राहत की मांग करता रहा है। ईरान का कहना है कि किसी भी समझौते से पहले अमेरिका को अपनी नीतियों के जरिए भरोसा पैदा करना होगा।
इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का ईरान दौरा भी चर्चा में है। पाकिस्तान दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने के प्रयास कर रहा है। इस दौरान ईरान के शीर्ष नेताओं ने अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते से पहले प्रतिबंधों में राहत और सैन्य दबाव खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि, दोनों देशों के बीच प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है।
संवर्धित यूरेनियम परमाणु ऊर्जा के उत्पादन और वैज्ञानिक कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसे बहुत अधिक स्तर तक संवर्धित करने पर इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी हो सकता है। यही वजह है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश लगातार चिंता जताते रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटना चाहिए।
ईरान ने अमेरिका के सामने प्रतिबंधों में राहत, आर्थिक दबाव खत्म करने और सैन्य तनाव कम करने जैसी मांगें रखी हैं। वहीं, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण चाहता है। दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी कूटनीतिक समाधान की राह में बड़ी बाधा बनी हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अमेरिका ईरान के सख्त रुख पर क्या प्रतिक्रिया देता है और पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत का कोई रास्ता निकल पाता है या नहीं।





