CSR फंड में 200 करोड़ की कथित हेराफेरी, 40 PSU जांच के घेरे में

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR फंड से जुड़े एक बड़े कथित घोटाले का खुलासा किया है। एजेंसी के मुताबिक, करीब 200 करोड़ रुपये के CSR फंड को चैरिटेबल ट्रस्ट, बिचौलियों और शेल कंपनियों के जरिए कथित तौर पर इधर-उधर किया गया। इस मामले में देश की करीब 40 सरकारी कंपनियां (PSU) और सरकारी बैंक जांच के दायरे में हैं।

ED के अनुसार, इस नेटवर्क का संचालन धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव सिंह नाम के व्यक्ति से जुड़ा है। एजेंसी का दावा है कि सिंह ने 12वीं तक पढ़ाई की थी और उसके पास मान्य मेडिकल डिग्री या मेडिकल काउंसिल का रजिस्ट्रेशन नहीं था, फिर भी वह करीब तीन दशक तक खुद को डॉक्टर बताता रहा। उसने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े CSR प्रोजेक्ट्स के नाम पर कई ट्रस्ट और संस्थाएं बनाईं।

जांच में आरोप है कि कंपनियों और PSUs से CSR का पैसा इन ट्रस्टों में भेजा जाता था। कई प्रोजेक्ट या तो पूरी तरह नहीं किए गए या मिले हुए पैसे के अनुपात में काम नहीं हुआ। इसके अलावा, कथित तौर पर वेंडर बिल बढ़ाकर दिखाए गए और अतिरिक्त रकम को फर्जी या शेल कंपनियों के जरिए आगे भेजा गया। ED के मुताबिक, CSR फंड जारी कराने में मदद करने वाले कुछ अधिकारियों और बिचौलियों को कमीशन या रिश्वत दिए जाने के भी आरोप हैं।

ED की जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में CSR के नाम पर मिले पैसे का एक बड़ा हिस्सा कथित तौर पर मूल दानदाता कंपनियों को ही नकद वापस कर दिया जाता था। कमीशन काटने के बाद रकम लौटाने का यह तरीका कथित तौर पर कंपनी के रिकॉर्ड में CSR खर्च दिखाकर पैसे को दोबारा नकद में बदलने के लिए इस्तेमाल किया गया। एजेंसी ने इसे वैध खाते के पैसे को कथित तौर पर बिना हिसाब वाले कैश में बदलने का जरिया बताया है।

इस मामले में ED ने 1 अक्टूबर को महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-NCR में 8 जगहों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान करीब 21 लाख रुपये नकद, दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए। जांच में CSR एजेंटों, बिचौलियों, अस्पतालों, उपकरण सप्लायरों और शेल कंपनियों के नेटवर्क की भी जानकारी सामने आई है। ED की जांच अभी जारी है और आने वाले समय में इस मामले में कई और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है।