दुनिया में न्यूमोनिक प्लेग फैलने की आशंका कम क्यों है?

न्यूमोनिक प्लेग प्लेग बीमारी का सबसे गंभीर रूप माना जाता है। यह Yersinia pestis नामक बैक्टीरिया के कारण होता है और सीधे फेफड़ों को प्रभावित करता है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या सांस के जरिए निकली बूंदों के संपर्क में आने से यह दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। हालांकि, इसके गंभीर होने के बावजूद दुनिया में इसके बड़े पैमाने पर फैलने की आशंका फिलहाल कम मानी जाती है।

इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि न्यूमोनिक प्लेग कोरोना या खसरे जैसी बेहद तेजी से फैलने वाली बीमारी नहीं है। आमतौर पर संक्रमण के लिए संक्रमित व्यक्ति के काफी करीब रहना और उसकी सांस या खांसी से निकलने वाली बूंदों के संपर्क में आना जरूरी होता है। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में इसका प्रसार सीमित रह सकता है।

एक और महत्वपूर्ण वजह यह है कि न्यूमोनिक प्लेग का इलाज उपलब्ध है। कई प्रभावी एंटीबायोटिक दवाएं इस संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं। अगर बीमारी की पहचान समय पर हो जाए और तुरंत इलाज शुरू कर दिया जाए, तो गंभीर स्थिति और संक्रमण के आगे फैलने का खतरा काफी कम किया जा सकता है।

इसके अलावा, संक्रमित मरीज को तुरंत अलग रखना, उसके संपर्क में आए लोगों की निगरानी करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें बचाव के लिए एंटीबायोटिक देना संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद करता है। स्वास्थ्य एजेंसियां ऐसे मामलों में निगरानी और संक्रमण रोकने के उपायों पर खास ध्यान देती हैं।

हालांकि, न्यूमोनिक प्लेग को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इलाज में देरी होने पर यह तेजी से गंभीर हो सकता है और जानलेवा भी साबित हो सकता है। लेकिन समय पर पहचान, प्रभावी इलाज, मरीज को आइसोलेट करना और संपर्कों की निगरानी जैसे उपायों के कारण इसके दुनिया भर में बड़े प्रकोप में बदलने की संभावना कम रहती है।