SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, नए वोटर्स के लिए नियमों में बदलाव

भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर हाल में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और उसे अपडेट करना है, ताकि पात्र मतदाताओं का नाम शामिल रहे और गलत या डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान की जा सके। SIR के दौरान नए मतदाताओं के Form 6 में अतिरिक्त जानकारी मांगी गई थी। इसमें आवेदक से खुद या अपने माता-पिता/दादा-दादी का पिछली SIR वाली मतदाता सूची में दर्ज होने से संबंधित विवरण देने को कहा गया था। इसमें पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी भी शामिल थी।

हालांकि, 30 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग ने उन राज्यों में Form 6 से यह अतिरिक्त SIR घोषणा हटा दी, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन राज्यों में नए मतदाताओं को अब सामान्य वैधानिक Form 6 के जरिए पंजीकरण करना होगा। वहीं जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR अभी जारी है, वहां यह घोषणा फिलहाल बनी हुई है। आयोग ने SIR से जुड़े नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए भी प्रक्रिया को आसान किया है। महाराष्ट्र में अब कई मामलों में Booth Level Officer (BLO) मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज ले सकते हैं और उन्हें ECINET पर अपलोड कर सकते हैं, जिससे हर मामले में मतदाता को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी।

SIR को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर भी बहस जारी है। कुछ मामलों में चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जबकि आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। कुल मिलाकर, SIR के तहत मतदाता सूची की जांच जारी है और नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े नियम राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकते हैं। इसलिए नए मतदाताओं के लिए अपने क्षेत्र के निर्वाचन कार्यालय या आधिकारिक चुनाव आयोग पोर्टल पर लागू नियमों की जानकारी देखना महत्वपूर्ण है।