मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। 29 सितंबर 2026 को वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस मामले का उल्लेख किया। वकील ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जल्द सुनवाई की मांग की।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ महत्वपूर्ण फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए। इसमें नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच लिए गए कुछ फैसलों और उन पर कथित तौर पर दर्ज की गई आपत्तियों का भी जिक्र किया गया है।
मामले का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच के लिए SIT गठित करने और चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम ECINet और ERONet की जांच की मांग भी की है।
याचिका में कथित तौर पर अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों, दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा पुराने Form-6 को बहाल करने की मांग की गई है, जिसका इस्तेमाल नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए किया जाता है।
वहीं, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसले सभी चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में इस मामले से जुड़े आरोपों, चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और कानूनी पहलुओं पर गौर किया जाएगा।





