एल नीनो के बीच भारत की जल सुरक्षा चुनौती, AIIB बढ़ाएगा जल क्षेत्र में निवेश

भारत में बदलते मौसम और बढ़ते जल संकट के बीच एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) देश के जल क्षेत्र में वित्तीय सहयोग बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। 26 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मानसून और बिगड़ती एल नीनो परिस्थितियों के बीच AIIB भारत में जल बुनियादी ढांचे और जल क्षेत्र से जुड़े नीतिगत सुधारों के लिए अधिक वित्त उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है। इस साल भारत में मानसूनी बारिश सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत कम बताई गई है, जिससे कई क्षेत्रों में जल उपलब्धता और कृषि पर दबाव बढ़ा है। महाराष्ट्र के कुछ जिलों में सूखे जैसी परिस्थितियों और जलाशयों के घटते स्तर की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि कर्नाटक में भी सूखे से निपटने के लिए कदम उठाए गए हैं। ऐसे हालात में जल सुरक्षा केवल पेयजल का मुद्दा नहीं रह जाती, बल्कि इसका सीधा संबंध कृषि, खाद्य सुरक्षा, उद्योग और आर्थिक विकास से जुड़ जाता है।

AIIB के अनुसार, भारत उसके लिए सबसे बड़ा वित्तपोषण गंतव्य है। बैंक ने अब तक भारत के लिए करीब 13.8 अरब डॉलर की वित्तीय मंजूरी दी है, लेकिन इसमें सीधे जल परियोजनाओं का हिस्सा 7 प्रतिशत से भी कम रहा है। अब बैंक जल उपयोगिता सेवाओं, औद्योगिक अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण, भूजल रिचार्ज और जल संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहता है। जल सुरक्षा की चुनौती का सबसे बड़ा हिस्सा कृषि से जुड़ा है। AIIB के अनुसार भारत के मीठे पानी की खपत में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत तक हो सकती है। ऐसे में माइक्रो-इरिगेशन, पानी की बचत करने वाली सिंचाई तकनीक और भूजल प्रबंधन को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण होगा। AIIB और Council on Energy, Environment and Water की हालिया रिपोर्ट ने उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग और माइक्रो-इरिगेशन में बड़े निवेश अवसरों की ओर भी संकेत किया है।

AIIB ने अपनी 2026 की Asian Infrastructure Finance रिपोर्ट में भी जल को केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि आर्थिक और बुनियादी ढांचे की आधारभूत व्यवस्था के रूप में देखने पर जोर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन जल चक्र को प्रभावित कर रहा है और भारत जैसे देशों में सूखा, अत्यधिक बारिश, भूजल पर दबाव और बाढ़ जैसे जोखिम एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए जल सुरक्षा के लिए जलाशयों और पाइपलाइन जैसी पारंपरिक परियोजनाओं के साथ-साथ नदी घाटियों, आर्द्रभूमि, जंगलों और भूजल प्रणालियों के संरक्षण पर भी निवेश जरूरी है। भारत के लिए चुनौती केवल अतिरिक्त धन जुटाने की नहीं, बल्कि उपलब्ध धन को प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने की भी है। AIIB का कहना है कि जल क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने के लिए बेहतर नीतियां, मजबूत संस्थागत व्यवस्था, उपयुक्त वित्तीय मॉडल और तकनीक की जरूरत होगी। शहरी जल आपूर्ति, स्मार्ट मीटरिंग और अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्रों में निजी पूंजी की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं। एल नीनो और जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून में बढ़ती अनिश्चितता भारत के लिए यह संकेत है कि जल प्रबंधन को केवल आपातकालीन सूखा राहत तक सीमित नहीं रखा जा सकता। दीर्घकालीन जल भंडारण, भूजल रिचार्ज, कुशल सिंचाई, शहरों में पानी की बचत और अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग जैसी रणनीतियां भारत की जल सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। AIIB का संभावित बढ़ा हुआ वित्तपोषण इसी व्यापक जल-सुरक्षा ढांचे का हिस्सा बन सकता है।