न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान भारत और लाइबेरिया ने समुद्री सुरक्षा को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय पहल शुरू की है। दोनों देशों ने ‘Group of Friends on Safety and Security of Shipping and Seafarers’ की स्थापना की है। इस समूह का उद्देश्य समुद्री व्यापार, जहाजों की सुरक्षा और दुनिया भर में काम करने वाले नाविकों यानी seafarers की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है। भारत और लाइबेरिया इस समूह की सह-अध्यक्षता करेंगे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने समूह की पहली बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत दुनिया के प्रमुख seafarer-supplying देशों में शामिल है, जबकि लाइबेरिया दुनिया के सबसे बड़े शिप रजिस्ट्रियों में से एक है। इसलिए दोनों देशों के बीच सहयोग समुद्री परिवहन से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय प्रयास को आगे बढ़ा सकता है। इस समूह में प्रमुख जहाज मालिक देशों, बड़े शिप रजिस्ट्रियों वाले देशों और बड़ी संख्या में समुद्री कर्मी उपलब्ध कराने वाले देशों को शामिल किया गया है। बैठक में करीब दो दर्जन से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
यह पहल ऐसे समय में हुई है जब हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी, लाल सागर, बाब-अल-मंदेब और काला सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में वाणिज्यिक जहाजों और उनके कर्मचारियों के लिए सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। जयशंकर ने कहा कि हाल के महीनों में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर बार-बार हुए हमले समुद्री व्यापार को प्रभावित कर रहे हैं और निर्दोष लोगों की जान भी जा रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे हमलों को रोकने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। भारत ने इससे पहले भी समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत उठाई है। हाल ही में BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘Seafarers Emergency Support Network’ का प्रस्ताव रखा था। इसके तहत संबंधित देशों के समुद्री अधिकारियों और दूतावासों के बीच संपर्क बेहतर बनाने, संकट की सूचना, चिकित्सा सहायता, परिवारों से संपर्क और जरूरत पड़ने पर निकासी जैसी सुविधाओं में सहयोग की बात कही गई थी। नई पहल का उद्देश्य केवल जहाजों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लाखों समुद्री कर्मियों की सुरक्षा और सहायता पर भी ध्यान देना है जो अलग-अलग देशों के झंडे वाले जहाजों पर काम करते हैं। चूंकि नाविक की राष्ट्रीयता और जहाज का पंजीकरण अलग-अलग देशों से जुड़ा हो सकता है, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए देशों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत और लाइबेरिया द्वारा शुरू किया गया यह समूह इसी अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक साझा मंच देने की दिशा में कदम है।





