भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दोनों देशों के बीच तेल और LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस की सप्लाई बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई रूट से जुड़ी चुनौतियों के बीच अमेरिका भारत के लिए ऊर्जा का एक अहम वैकल्पिक स्रोत बनकर उभर रहा है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लंबे समय से अलग-अलग देशों से कच्चा तेल और गैस खरीदता है। अब अमेरिका से LNG, कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद बढ़ने से भारत को अपनी ऊर्जा सप्लाई के स्रोतों में विविधता लाने में मदद मिलेगी। इससे किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता का जोखिम भी कम किया जा सकता है।
अमेरिका और भारत ने ऊर्जा व्यापार बढ़ाने को लेकर पहले ही अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है। दोनों देशों के बीच हुए समझौतों में तेल, LNG और अन्य ऊर्जा उत्पादों की खरीद बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और कारोबारी सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। आने वाले समय में अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों और भारतीय कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।
LNG के मामले में भी अमेरिका की भूमिका तेजी से बढ़ी है। हाल के महीनों में भारत ने पश्चिम एशिया से होने वाली सप्लाई में अनिश्चितता के बीच अमेरिका समेत कई देशों से LNG की खरीद बढ़ाई है। इससे भारत को गैस की जरूरत पूरी करने के लिए अतिरिक्त विकल्प मिल रहे हैं। LPG की सप्लाई के लिए भी भारत अलग-अलग देशों से खरीद बढ़ाकर अपनी व्यवस्था को मजबूत कर रहा है।
भारत के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। ऐसे में अलग-अलग देशों से ऊर्जा खरीदना सप्लाई को स्थिर रखने में मदद करता है। हालांकि अमेरिका से तेल और गैस लाने में लंबी दूरी और परिवहन लागत जैसी चुनौतियां भी हैं। इसलिए भारत की रणनीति किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय कई स्रोतों से संतुलित तरीके से ऊर्जा खरीदने की है।
कुल मिलाकर, अमेरिका से तेल और LNG की बढ़ती सप्लाई भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है। बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा कारोबार आने वाले समय में दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का एक अहम हिस्सा बन सकता है।





